ग्वालियरः राखी के धागे ने बांधे रिश्ते, अपनों से दूर चेहरों पर खिल उठी मुस्कान
- कलेक्टर ने मंगलधाम वृद्ध आश्रम के रहवासियों के साथ मनाया रक्षाबंधन
ग्वालियर, 28 अगस्त (हि.स.)। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते में बंधे स्नेह का पर्व नहीं, बल्कि उन दिलों तक पहुंचने का अवसर भी है, जिन्हें अपनत्व की सबसे अधिक जरूरत है। इसी मानवीय भावना के साथ मध्य प्रदेश के ग्वालियर में इस बार रक्षाबंधन का पर्व प्रशासनिक दायित्वों से आगे बढ़कर आत्मीय रिश्तों का पर्व बन गया। अपनों से दूर रह रहे बुजुर्गों और परिवार से दूर बालिकाओं के बीच पहुंचकर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनके साथ पर्व की खुशियां साझा कीं।
शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर नेहरू कॉलोनी, थाटीपुर स्थित मंगलधाम वृद्ध आश्रम में उस समय माहौल भावुक हो गया, जब कलेक्टर रुचिका चौहान वहां पहुंचीं। अपने साथ उपहार और मिठाइयां लेकर पहुंचीं कलेक्टर ने आश्रम में रह रहे भाइयों की कलाइयों पर स्नेहपूर्वक राखी बांधी और उन्हें उपहार भेंट किए।
लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे बुजुर्गों के लिए यह पल अपनेपन की कमी को भर गया। राखी के धागे के साथ मिले इस स्नेह ने उनके चेहरों पर खुशी ला दी। कलेक्टर रुचिका चौहान के साथ एसडीएम नरेश चंद्र गुप्ता एवं तहसीलदार कुलदीप दुबे भी मंगलधाम पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने आश्रम में रह रही बहनों से राखियां बंधवाईं और उन्हें उपहार भेंट कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों की आत्मीयता से आश्रम का वातावरण पारिवारिक स्नेह से भर उठा।
जब बेटियों ने बांधी राखी, अधिकारियों ने निभाया भाई का रिश्ता
कलेक्टर रुचिका चौहान की पहल पर जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों ने भी विभिन्न आश्रमों एवं बालिका संरक्षण गृहों में पहुंचकर रक्षाबंधन मनाया। अपर कलेक्टर अनिल बनवारिया जेएएच परिसर स्थित माँ कैला देवी बालिका गृह पहुंचे। यहां बालिकाओं ने उन्हें राखी बांधी। उन्होंने बालिकाओं के साथ आत्मीयता से समय बिताया और उपहार भेंट किए। तहसीलदार महेश कुशवाह ने भी बालिकाओं से राखियां बंधवाईं और उन्हें उपहार भेंट कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
रक्षाबंधन के अवसर पर जिला प्रशासन की यह पहल संवेदनशीलता और अपनत्व का संदेश बन गई। जिन कलाइयों पर राखी बांधने वाला कोई अपना दूर है, वहां प्रशासन के अधिकारी भाई बनकर पहुंचे। राखी के धागों ने यह एहसास कराया कि रिश्ते केवल खून के नहीं होते। सच्चा अपनापन, सम्मान, संवेदना और स्नेह भी रिश्तों को जन्म देते हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

