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मप्र: वनरक्षक- जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा निरस्त होने पर एनएसयूआई का प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

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मप्र: वनरक्षक- जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा निरस्त होने पर एनएसयूआई का प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग


कर्मचारी चयन मंडल कार्यालय का घेराव कर सौंपा ज्ञापन, अभ्यर्थियों को राहत देने की भी उठाई मांग

भोपाल, 08 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश में वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक, जेल प्रहरी एवं सहायक जेल अधीक्षक भर्ती परीक्षा-2026 निरस्त किए जाने के बाद सोमवार को एनएसयूआई ने मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने व्यापमं चौराहा स्थित कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की तथा कर्मचारी चयन मंडल के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा।

एनएसयूआई का यह प्रदर्शन प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार एवं भोपाल जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर के नेतृत्व में आयोजित किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त परीक्षा नियंत्रक दिनेश अग्रवाल को ज्ञापन सौंपते हुए परीक्षा निरस्त होने से प्रभावित अभ्यर्थियों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की।

अभ्यर्थियों को हुई असुविधा का मुद्दा उठाया

एनएसयूआई नेताओं ने आरोप लगाया कि सात जून को आयोजित परीक्षा के दौरान प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को तकनीकी समस्याओं, प्रशासनिक अव्यवस्थाओं और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं अन्य राज्यों से हजारों अभ्यर्थी लंबी दूरी तय कर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे थे। कई अभ्यर्थियों ने यात्रा, आवास और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किया, लेकिन परीक्षा केंद्रों पर घंटों इंतजार के बाद परीक्षा निरस्त कर दी गई।

प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभ्यर्थी लंबे समय तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा के दिन उत्पन्न हुई परिस्थितियों से उन्हें मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठाए सवाल

जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि परीक्षा संचालन में सामने आई समस्याओं ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर प्रश्न खड़े किए हैं। उनका कहना था कि यदि तकनीकी व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तैयारियों का समय रहते परीक्षण किया जाता तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था। उन्होंने मांग की कि परीक्षा आयोजन में हुई किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए।

अभ्यर्थियों को राहत देने की मांग

एनएसयूआई ने ज्ञापन के माध्यम से कई मांगें रखीं, जिनमें परीक्षा शुल्क वापस करने, पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को यात्रा एवं अन्य खर्चों के लिए आर्थिक सहायता देने, पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग शामिल है। संगठन ने यह भी कहा कि पुनर्परीक्षा की तिथि पर्याप्त समय पहले घोषित की जाए और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए परीक्षा केंद्रों की तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का पूर्व परीक्षण अनिवार्य किया जाए। साथ ही प्रभावित अभ्यर्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष हेल्पलाइन और शिकायत प्रकोष्ठ स्थापित करने की भी मांग की गई।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

वहीं, छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि परीक्षा निरस्त होने के कारणों की पारदर्शी जांच नहीं हुई और जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे