मप्रः छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के एनआईसीयू में लगी आग, एक बच्चे की मौत, दो झुलसे
- मृतक बच्ची के परिजन को 4 लाख की सहायता, उपचाररत बच्चों का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
छिंदवाड़ा, 22 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) के वॉर्मर में आग लगने से एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि दो बच्चे बुरी तरह झुलस गए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शोकाकुल परिवार को यह पीड़ा सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजन को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाररत दोनों बच्चों के संपूर्ण इलाज का खर्च शासन द्वारा वहन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर जिला प्रशासन छिंदवाड़ा के अधिकारी जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन के साथ लगातार संपर्क में हैं। दोनों बच्चों के उपचार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल के एनआईसीयू में शनिवार तड़के आग लग गई। शॉर्ट सर्किट से लगी आग की चपेट में तीन नवजात बच्चे आ गए। तीनों की उम्र 6 से 12 दिन के बीच है। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें सुबह करीब 5 बजे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां ले जाते समय रास्ते में एक की मौत हो गई।
उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने शनिवार देर शाम जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की न्यूनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में जिला अस्पताल छिंदवाड़ा से रेफर होकर आए बच्चों को दिये जा रहे उपचार की जानकारी ली। उन्होंने भर्ती बच्चों के परिजनों से भी भेंट कर उन्हें बेहतर से बेहतर इलाज का भरोसा दिया।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों से भी चर्चा की तथा उन्हें बच्चों के उपचार में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखने के निर्देश दिये। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना, मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा तथा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी भी इस दौरान उनके साथ मौजूद थे।
मृत बच्ची के पिता किशनपुर चांद निवासी आदित्य वर्मा के मुताबिक, प्रसव के लिए पत्नी को तीन दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार रात 10:30 बजे उसने बच्ची को जन्म दिया। शनिवार सुबह आग लगने से बच्ची की मौत हो गई।
डॉक्टर कंचन दुबे के अनुसार, एनआईसीयू में एक प्लग में शॉर्ट सर्किट हुआ था। इसी के कारण उस डोली में आग लगी, जिसमें तीनों बच्चे थे। आग धीरे-धीरे डोली में लगे प्लास्टिक और कपड़ों तक पहुंच गई।
घटना के समय एनआईसूयू में 20 से ज्यादा नवजात और तीन स्टाफ सदस्य मौजूद थे। आग केवल एक यूनिट तक सीमित रही और उसी हिस्से को नुकसान पहुंचा है। मौके पर मौजूद परिजनों ने भी शॉर्ट सर्किट के बाद आग लगने की बात कही है। तीनों बच्चों को प्रसव के बाद इंफेक्शन होने के कारण एनआईसीयू में भर्ती कराया गया था। पुलिस ने भी अस्पताल पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रबंधन में आग लगने के कारण और सुरक्षा इंतजामों की भी जांच कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

