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मप्रः भोपाल में वक्फ की 2.7 एकड़ जमीन विवाद में दारुल शफकत सोसायटी के अध्यक्ष पर एफआईआर

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मप्रः भोपाल में वक्फ की 2.7 एकड़ जमीन विवाद में दारुल शफकत सोसायटी के अध्यक्ष पर एफआईआर


- वक्फ की जमीन को अपनी बताकर नक्शा पास कराने का आरोप

भोपाल, 27 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र में वक्फ संपत्ति के प्रबंधन और उससे होने वाली आय को लेकर दारुल शफकत सोसायटी के अध्यक्ष शाहिद अलीम खान समेत अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की शिकायत पर पुलिस ने गुरुवार को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 316(2) के तहत केस दर्ज किया है।

मप्र वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने आरोप लगाया कि सोसायटी ने वक्फ की करीब 2.7 एकड़ जमीन को अपना बताते हुए नगर निगम से नक्शा पास कराया और संपत्ति को किराए पर देकर आय अर्जित की। यह संपत्ति वर्ष 1961 से वक्फ के नाम गजट नोटिफाइड है। उनके मुताबिक, दारुल शफकत सोसायटी को संपत्ति के एक हिस्से में संस्था संचालित करने की अनुमति थी, लेकिन सोसायटी ने पूरी 2.7 एकड़ संपत्ति पर अधिकार जताना शुरू कर दिया।

सनवर पटेल ने कहा कि सोसायटी के जिम्मेदारों ने नगर निगम में भवन का नक्शा पास कराने के दौरान खुद को संपत्ति का मालिक बताते हुए शपथ पत्र दिए। उनके मुताबिक, किराया अनुबंधों में भी सोसायटी को संपत्ति का मालिक बताया गया, जबकि वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज है।

उन्होंने कहा कि इसी आधार पर पुलिस ने शाहिद अलीम और अन्य के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। मामले में सोसायटी के दूसरे पदाधिकारियों की भूमिका भी जांची जाएगी। बैठक की कार्रवाई और मिनट्स के आधार पर यह देखा जाएगा कि संपत्ति को अपना बताने वाले फैसलों में कौन-कौन शामिल था।

सनवर पटेल ने दावा किया कि वक्फ की इस जमीन पर इज्तिमा बाजार भी लगाया जाता है और इससे सालाना करीब 2 से ढाई करोड़ रुपये की आय होने की बात सामने आई है। उनका आरोप है कि इस आय का उचित हिसाब वक्फ बोर्ड को नहीं दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड इज्तिमा बाजार के खिलाफ नहीं है, लेकिन बाजार का संचालन नियमों के अनुसार होना चाहिए। व्यापारियों का पुलिस वेरिफिकेशन, दुकानों का विधिवत आवंटन और प्राप्त राशि का पारदर्शी हिसाब होना चाहिए।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि मामले की जांच के बाद 28 करोड़ 91 लाख रुपये की आरआरसी (रेवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी की गई है। वक्फ अधिनियम के तहत कलेक्टर के माध्यम से संबंधित लोगों की चल-अचल संपत्तियों से राशि की वसूली की जाएगी। उन्होंने बताया कि वक्फ संपत्ति से अर्जित राशि यदि किसी अन्य संपत्ति को खरीदने में इस्तेमाल हुई है तो उस संपत्ति की भी जांच की जाएगी। यदि यह साबित होता है कि वक्फ की आय से कोई दूसरी संपत्ति खरीदी गई है तो उसके मालिकाना हक को लेकर भी वक्फ बोर्ड कार्रवाई करेगा।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि शाहिद अलीम को संपत्ति के प्रबंधन की जिम्मेदारी मिलने के बाद से करीब 20 वर्षों से वक्फ बोर्ड को आय-व्यय का पूरा हिसाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पहले करीब 20 साल तक हिसाब दिया जाता रहा, लेकिन शाहिद अलीम की नियुक्ति के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि यदि वक्फ संपत्ति से प्राप्त आय को किसी अन्य संपत्ति या स्कूल की खरीद में लगाया गया है तो उस संपत्ति के मालिकाना हक की भी जांच होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए चल रहे स्कूल का संचालन जारी रहने का बोर्ड स्वागत करता है, लेकिन यदि उसकी खरीद वक्फ की आय से हुई है तो उसके स्वामित्व की वैधानिक स्थिति भी जांची जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर