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मप्रः ईओडब्ल्यू ने 1.55 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में 7 लोगों के खिलाफ दर्ज की एफआईआर

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मप्रः ईओडब्ल्यू ने 1.55 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में 7 लोगों के खिलाफ दर्ज की एफआईआर


भोपाल, 27 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने राजधानी भोपाल स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय में मेस भुगतान के नाम पर फर्जीवाड़े के खिलाफ खुलासा किया है। एक करोड़ 55 लाख 49 हजार 498 रुपये की धोखाधड़ी के इस मामले में बुधवार को 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

मामले में फर्जीवाड़े के कथित मास्टरमाइंड गौरव शर्मा, फर्जी फर्म संचालक हर्ष सरजानी, कर्मचारी कुलदीप शुक्ला, विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य विजय सिंह महोदिया, संतोष सिंह सिसोदिया, वीरेन्द्र दुबे तथा तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा को आरोपी बनाया गया है।

ईओडब्यू ने जानकारी दी है कि जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा प्रदेश के चार श्रमोदय विद्यालयों- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में मेस संचालन के लिए टेंडर जारी किए गए थे।

भोपाल और इंदौर के विद्यालयों का ठेका “कलका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड” कंपनी को मिला था। कंपनी विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराती थी और भुगतान उसके बैंक ऑफ बड़ौदा, गोवा स्थित खाते में किया जाता था।

ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2023 में कंपनी में सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत गौरव शर्मा ने सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़े की साजिश रची। उसने असली कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर “कलका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस” नाम से फर्जी फर्म तैयार कराई। यह फर्म उसके परिचित हर्ष सरजानी के नाम पर बनाई गई और उसका खाता एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंदौर में खुलवाया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि 27 जून 2024 को गौरव शर्मा ने फर्जी लेटरहेड तैयार कर कर्मचारी कुलदीप शुक्ला के माध्यम से स्कूल की अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा को बैंक खाता बदलने संबंधी पत्र सौंपा। इसमें भविष्य के सभी भुगतान नए खाते में करने की जानकारी दी गई।

ईओडब्ल्यू के अनुसार लेखापाल लीना विश्वकर्मा ने बिना वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति लिए बैंक खाता बदल दिया। भुगतान स्वीकृति की नोटशीट में असली कंपनी “कलका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड” का नाम लिखा जाता था, लेकिन चेक जारी करते समय “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर राशि फर्जी फर्म के खाते में ट्रांसफर की जाती रही।

जांच में विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य विजय सिंह महोदिया, संतोष सिंह सिसोदिया और वीरेन्द्र दुबे की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर फर्जी चेकों पर हस्ताक्षर किए और करोड़ों रुपये फर्जी खाते में ट्रांसफर होने दिए। ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि बैंक खाता परिवर्तन का आधिकारिक पत्र जून 2024 में दिया गया था, जबकि फर्जी खाते में पहला भुगतान अक्टूबर 2023 में ही कर दिया गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर