पूरी गंभीरता के साथ करें जनगणना संबंधी दायित्वों का निर्वहनः कलेक्टर रुचिका चौहान
ग्वालियर, 23 मार्च (हि.स.)। पूरी गंभीरता व मुस्तैदी के साथ जनगणना संबंधी दायित्व का निर्वहन करें। साथ ही भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा के तहत सभी कार्य पूर्ण किए जाएं।
यह निर्देश मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सोमवार को हुई जिला जनगणना समन्वय समिति की बैठक में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी रुचिका चौहान ने संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में बताया गया कि जिले में जनगणना के लिये प्रगणक व पर्यवेक्षकों का चयन कर लिया गया है। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम की तिथियां भी निर्धारित कर दी गई हैं।
कलेक्टर ने बैठक में मौजूद विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधीनस्थ शासकीय सेवकों को अधिक दिन का अवकाश देने से पहले जिला जनगणना कार्यालय से पता लगा लें कि उनकी ड्यूटी जनगणना में तो नहीं लगी है। बैठक में अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, एडीएम सीबी प्रसाद एवं जिला जनगणना अधिकारी अनिल बनवारिया सहित समिति के अन्य सदस्यगण मौजूद थे।
ज्ञात हो कि देश में पहली बार डिजिटल रूप से जनगणना होने जा रही है। साथ ही पहली बार स्व-गणना का अवसर भी लोगों को दिया गया है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति एसई वेब पोर्टल के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में जनगणना संबंधी 34 बिंदुओं में अपनी जानकारी स्वयं भर सकेगा।
प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना होगी
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत ग्वालियर जिले में भी दो चरणों में जनगणना होगी। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (एचएलओ) कार्य मध्य प्रदेश में 01 मई से 30 मई 2026 तक किया जायेगा। इस चरण का उद्देश्य द्वितीय चरण अर्थात जनसंख्या गणना के लिये मास्टर फ्रेम तैयार करना है। जनगणना के द्वितीय चरण का काम फरवरी 2027 में होगा। देश के बर्फीले क्षेत्रों में सितम्बर 2026 में द्वितीय चरण की गणना होगी।
जिले में लगभग 6 हजार अधिकारी-कर्मचारी करेंगे जनगणना
ग्वालियर जिले में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी रुचिका चौहान के नेतृत्व में लगभग 6 हजार अधिकारी-कर्मचारी जनगणना-2027 के कार्य को अंजाम देंगे। इनमें लगभग 5 हजार प्रगणक व 829 पर्यवेक्षक, 41 चार्ज अधिकारी, 42 फील्ड ट्रेनर्स, 4 मास्टर ट्रेनर्स व 9 जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। शहरी क्षेत्र में नगर निगम आयुक्त प्रमुख जनगणना अधिकारी का दायित्व निभायेंगे। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत के सीईओ यह जिम्मेदारी निभायेंगे। प्रथम चरण में प्रगणक घर-घर जाकर मकान सूचीकरण व मकानों की गणना का कार्य करेंगे। साथ ही लोगों द्वारा स्वत: ही मोबाइल एप पर 34 बिंदुओं में भरी गई जानकारी की जांच कर सत्यापन भी करेंगे। ज्ञात हो जनगणना – 2027 के लिये ग्वालियर जिले में जिन्हें प्रशासनिक इकाई माना गया है, उनमें 10 तहसील, 10 नगर व 589 गाँव शामिल हैं।
प्रत्येक प्रगणक व पर्यवेक्षक को मानदेय के रूप में मिलेंगे 25 – 25 हजार रुपये
जनगणना-2027 का कार्य करने वाले प्रगणकों व पर्यवेक्षकों को भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय द्वारा आकर्षक मानदेय प्रदान किया जायेगा। प्रत्येक प्रगणक व पर्यवेक्षक को दोनों चरणों में जनगणना से संबंधित कार्य के लिये कुल मिलाकर 25 – 25 हजार रुपए मानदेय के रूप में प्रदान किए जायेंगे।
प्रगणक करेंगे डाटा संग्रहण और डाटा की बहुस्तरीय जाँच होगी
प्रदेश स्तरीय जनगणना कार्यालय भोपाल से आईं सुश्री प्रेमा नायर ने प्रशिक्षण के दौरान जानकारी दी कि प्रगणक घर-घर जाकर “Census 2027-HLO” मोबाइल एप का उपयोग कर डिजिटल डाटा संग्रह करेंगे। साथ ही लोगों द्वारा पोर्टल पर स्व-गणना के तहत भरी गई जानकारी का सत्यापन भी करेंगे। दोनों तरह से प्राप्त डाटा की बहुस्तरीय जाँच होगी। पहले यह कार्य पर्यवेक्षकों द्वारा किया जायेगा। साथ ही चार्ज अधिकारी भी मैदान में जाकर पुन: सत्यापन कर त्रुटियां ठीक करायेंगे। उन्होंने ग्राम व नगर रजिस्टर का प्रारूप व विषय वस्तु, ग्रामीण व नगरीय चार्ज रजिस्टर, प्रगणक, पर्यवेक्षकों व चार्ज अधिकारियों के कार्य, पर्यवेक्षण व कानूनी शक्तियां इत्यादि के बारे में भी जानकारी दी।
प्रथम चरण में 34 बिंदुओं की जानकारी संकलित होगी
जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का काम किया जायेगा। जिसमें 34 बिंदुओं में जानकारी संकलित होगी। इसमें भवन व मकान नम्बर सहित मकान की स्थिति, परिवार क्रमांक, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, मकान किराए का है अथवा स्वयं का, कमरों की संख्या, परिवार के विवाहित दम्पत्तियों की संख्या, पेयजल के मुख्य स्त्रोत, पेयजल स्त्रोतों की उपलब्धता, प्रकाश का मुख्य स्त्रोत, शौचालय की सुगमता, शौचालय का प्रकार, गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था, परिसर के अंदर स्नान की सुविधा, रसोई घर व एलपीजी-पीएनजी कनेक्शन, खाना पकाने के लिये प्रयुक्त मुख्य ईंधन, रेडियो/ट्रांजिस्टर व टेलीविजन की उपलब्धता, इंटरनेट सुविधा, लेपटॉप/कम्प्यूटर की उपलब्धता, टेलीफोन, मोबाइल फोन व स्मार्ट फोन इत्यादि की उपलब्धता, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, मोपेड, कार, जीप व वैन, परिवार द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले अनाज, मसलन चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का व अन्य खाद्यान्न एवं मोबाइल फोन इत्यादि जानकारी शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

