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दीक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी समाज और देश के विकास में सहयोग दें: राज्यपाल पटेल

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दीक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी समाज और देश के विकास में सहयोग दें: राज्यपाल पटेल


दीक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी समाज और देश के विकास में सहयोग दें: राज्यपाल पटेल


दीक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी समाज और देश के विकास में सहयोग दें: राज्यपाल पटेल


- सम्राट विक्रमादित्य विवि के 30वाँ दीक्षांत समारोह में 74 विद्यार्थियों को उपाधि, 107 को गोल्ड मेडल और एक शोधार्थी को डी-लिट् की प्रदान की गई उपाधि

भोपाल, 17 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों से कहा कि आज दीक्षांत के साथ आप सभी ने समाज के उत्थान और देश की एकता के लिए शपथ ली है। विश्वविद्यालय से जो संस्कार आपको मिले है उन्हें जीवन भर स्मरण रखकर कार्य करें।

राज्यपाल पटेल मंगलवार को उज्जैन में विक्रम विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आपके माता-पिता ने आपको शिक्षित करने के लिए बहुत कष्ट उठाए है इसलिए पढ़ लिखकर अपने माता-पिता की सेवा करें। आप जीवन में कुछ भी बन जाओं परंतु अपने माता-पिता और गुरु के प्रति सदैव आभारी रहना, उनकी सेवा करना। शिक्षित होने का उद्देश्य मात्र उपाधि अथवा प्रमाण-पत्र पाना नहीं बल्कि समाज और देश की उन्नति में योगदान देकर एक जिम्मेदार नागरिक भी बनना है।

राज्यपाल ने कहा कि आज विक्रम विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर अत्यधिक आनन्द का अनुभव हो रहा है। उन्होंने दीक्षान्त समारोह में उपाधियां प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए सभी के यशस्वी एवं मंगलमय भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि उज्जैन नगरी में आते ही एक अलग प्रकार की अनुभूति होती है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में ही एक विद्यार्थी ने शिक्षा प्राप्त की और आज वे प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

राज्यपाल पटेल की अध्यक्षता और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में उज्जैन में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30 वां दीक्षांत समारोह स्वर्ण जयंती सभागृह सम्पन्न हुआ। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश का राज्यपाल बनने के अगले ही दिन वे भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के लिए आए और यहीं से उन्हें प्रदेश के सतत विकास और देश की प्रगति के लिए प्रयासरत रहने की प्रेरणा प्राप्त हुई।

भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन को बनाया अपनी शिक्षा स्थली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान और ध्यान के वैश्विक केन्द्र उज्जैन को भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षास्थली के रूप में चुना। चौसठ कलाओं और 14 विद्याओं की यह धरती शौर्य के प्रतीक सुशासन के पुरोधा, विक्रम संवत के प्रवर्तक, भारतीय सांस्कृतिक चेतना के रक्षक और न्यायप्रियता के प्रतीक सम्राट विक्रमादित्य की कर्मस्थली रही है। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधि वितरण नहीं बल्कि 7 दशकों के उस समर्पण का परिणाम है, जिसने दुनिया को कुशल मानव संसाधन और श्रेष्ठ स्कॉलर सौंपे हैं। विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य का नाम जुड़ने से विश्वविद्यालय और विद्यार्थियों का गौरव बढ़ा है। ऐसे विश्वविद्यालय की उपाधियों से विभूषित होना विद्यार्थियों के लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीक्षांत समारोह में डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डी-लिट), गोल्ड मेडल और स्नातक उपाधियां प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन में सीखने की एक नई शुरुआत है, यह जीवन का महत्वपूर्ण टर्निंग पाइंट है। बेहतर जीवन के लिए विद्यार्थियों को सीखने की ललक सदैव बनाए रखना होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी देश और प्रदेश के समग्र विकास में सहभागी बनेंगे और जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने कर्तव्य का पूर्ण निष्ठा के साथ निवर्हन करते हुए अपने परिवार, समाज और देश का गौरव बढ़ायेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को ससम्मान उपाधियां प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई है। यह विश्वविद्यालय प्रसिद्ध कवि श्री शिवमंगल सिंह सुमन और पद्मश्री विष्णु श्रीधर वाकणकर जैसी महान विभूतियों की कर्मस्थली रहा है। नवाचार में अग्रणी यह विश्वविद्यालय, कृषि अध्ययन शाला और डेयरी टेक्नालॉजी जैसे आधुनिक विषयों को आरंभ करने के लिए पहल करने में भी प्रदेश में प्रथम रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय को विभिन्न यंत्रों के लिए 51 लाख रुपये, 5 ड्रोन तथा अध्ययन यात्रा के लिए एक बस प्रदान करने की घोषणा की।

नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन और भर्तृहरि छात्रावास भवन का किया लोकार्पण

राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 17 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन का लोकार्पण एवं एमईआरयू परियोजना अंतर्गत नव श्रृंगारित भर्तृहरि छात्रावास का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सम्पादित पुस्तकों ईकोस एण्ड एक्सप्रेशन्स, कंटूर्स ऑफ थॉट, रागात्मिका सहित 4 पुस्तकों का विमोचन भी किया। उपाधियाँ प्रदान करने के बाद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने सभी उपाधि प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को उपदेश देकर शपथ दिलाई।

निकली अकादमिक शोभायात्रा

विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के प्रारंभ में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने कार्यपरिषद सदस्यों व संकाय अध्यक्षों के साथ समूह चित्र खिंचवाया। इसके बाद दीक्षांत समारोह की अकादमिक शोभा यात्रा निकाली गई। कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा और नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव शामिल रहें।

सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर अर्पित की पुष्पांजलि

विश्वविद्यालय के प्रशासनिक परिसर स्थित सम्राट विक्रमादित्य के मूर्तिशिल्प पर पुष्पांजलि अर्पित की। एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह के प्रारंभ में राष्ट्रगीत वंदेमातरम और राष्ट्रगान जन-गण-मन हुआ। अतिथियों ने माँ वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।

हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का किया अवलोकन

राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथियों ने हथकरघा इकाई की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आचार्य विद्यासागर पीठ एवं संस्था द्वारा अतिथियों को हाथ से बनी हथकरघा सामग्री भेंट की।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने स्वागत भाषण देते हुए विगत 01 वर्ष के दौरान विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद कॉमर्स विषय की स्नातक श्वेता तलेसरा को विश्वविद्यालय द्वारा डी-लिट् की उपाधि से अलंकृत किया गया। साथ ही विश्वविद्यालय के 74 विद्यार्थियों को उपाधि और 107 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर