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सेवा के दौरान किए गए उत्कृष्ट कार्य ही बनते हैं पहचान: डीजीपी मकवाणा

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सेवा के दौरान किए गए उत्कृष्ट कार्य ही बनते हैं पहचान: डीजीपी मकवाणा


- पीटीआरआई में मप्र पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन का 23वें विशिष्ट सदस्य सम्मान समारोह संपन्न

भोपाल, 28 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में किए गए कार्यों का भी जिक्र करते हुए उन पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में उत्कृष्ट कार्य किया। उन्होंने कहा कि सेवा के दौरान किए गए उत्कृष्ट कार्य ही हमारी पहचान बनाते हैं।

डीजीपी मकवाणा शनिवार को भोपाल के जहांगीराबाद स्थित पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) में मध्य प्रदेश पुलिस पेंशनर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित 23वें विशिष्ट सदस्य सम्मान समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुई। यह कार्यक्रम वर्ष 2003 से निरंतर आयोजित हो रहा है। इस अवसर पर डीजीपी ने कार्यक्रम में उपस्थित 75 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले सेवानिवृत्त राजन सिंह, नरेंद्र कुमार त्रिपाठी, राम कुमार वर्मा एवं श्री शरदचंद्र दुबे को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया।

डीजीपी कैलाश मकवाणा ने अपने संबोधन में अपने सेवा काल के महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए। अपने कार्यकाल में उन्होंने “चड्डी बनियान गैंग” को पकड़ने के दौरान प्राप्त उपलब्धि का उल्लेख किया, जिसके लिए उन्हें पुरस्कार स्वरूप 315 बोर राइफल प्रदान की गई थी, इसे उनके द्वारा अपने जीवन का लैंडमार्क केस बताया गया।

उन्होंने वर्तमान में पुलिस विभाग में किए जा रहे नवाचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि डायल-112 सेवा के माध्यम से त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पुलिसकर्मियों को तनावमुक्त रखने के लिए हार्टफुलनेस संस्था के साथ एमओयू कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत थाना स्तर पर साप्ताहिक मेडिटेशन नियमित रूप से कराया जा रहा है। इसके साथ ही ई-ऑफिस प्रणाली, ईएचआरएमएस पोर्टल, साइबर जागरूकता के लिए “सेफ क्लिक” अभियान तथा नशे के विरुद्ध “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।

मकवाणा ने कहा कि पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण से संबंधित समस्याओं के समाधान, उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने, मुख्यालय स्तर पर जनसुनवाई पुनः प्रारंभ करने तथा लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ लगभग 12 हजार पुलिसकर्मियों के रोटेशन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। साथ ही नई भर्ती प्रक्रिया को गति देने के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन का प्रस्ताव भी प्रेषित किया गया है। साइबर अपराधों की बढ़ती गंभीरता को देखते हुए ई-जीरो एफआईआर की व्यवस्था तथा सेफ सिटी परियोजना के अंतर्गत प्रमुख नगरों एवं हाईवे को सीसीटीवी से सुरक्षित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने जीवन के अनुभव साझा किए। पूर्व डीजी एनसीआरबी नरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि सेवा निवृत्ति के पश्चात उन्होंने 33 देशों की यात्रा की, जिससे उन्हें जीवन के विविध अनुभव प्राप्त हुए। वहीं शरदचंद्र दुबे ने अपने कार्यकाल के अनुभवों का उल्लेख करते हुए प्रशिक्षण एवं अंतरराष्ट्रीय सहभागिता की महत्ता पर प्रकाश डाला। राम कुमार वर्मा द्वारा अपने कार्यकाल में किए गए लगभग 40 तकनीकी कोर्स का उल्लेख करते हुए निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

इसके अलावा इस समारोह में एसोसिएशन की वार्षिक पत्रिका सात्विक का विमोचन भी मुख्य अतिथि श्री कैलाश मकवाणा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान पेंशनर्स द्वारा डीजीपी से अनुरोध किया गया कि सेवानिवृत्ति के पश्चात मानसिक शांति हेतु नियमित गतिविधियों का संचालन किया जाए। इस पर डीजीपी मकवाणा ने निकटतम पुलिस लाइन में मेडिटेशन गतिविधियों से जुड़ने की सलाह दी। साथ ही पेंशनर्स डे प्रत्येक माह एक दिन निर्धारित करने का सुझाव भी प्रस्तुत किया गया, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी समस्याएं रख सकें।

कार्यक्रम में सहयोग हेतु 23वीं वाहिनी भोपाल की महिला आरक्षकों को डीजीपी द्वारा सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त कल्याण शाखा द्वारा पेंशनर्स एसोसिएशन के लिए अनुग्रह राशि का चेक भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष जीपी दुबे, अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद, संगठन उपाध्यक्ष बीएस रघुवंशी एवं अन्य वरिष्ठ सेवानिवृत पुलिस अधिकारी परिवार सहित उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर