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दमोह में पंजीयन कार्यालयों की अनियमितताओं पर कार्रवाई, दो उप-पंजीयक निलंबित

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दमोह में पंजीयन कार्यालयों की अनियमितताओं पर कार्रवाई, दो उप-पंजीयक निलंबित


दमोह, 27 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पंजीयन कार्यालयों में कथित अनियमितताओं, भूमि के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच में लापरवाही और टोकन के नाम पर नागरिकों से अतिरिक्त राशि मांगे जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मंगलवार को दो उप-पंजीयकों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में विमल कुमार साहू और ज्योति पटेल शामिल हैं। यह कार्रवाई आकस्मिक निरीक्षण और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से प्राप्त विस्तृत जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि पंजीयन कार्यालयों में अनियमितताओं और आम नागरिकों को परेशान किए जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। कुछ शिकायतों में भूमि का वास्तविक स्वामी कोई अन्य व्यक्ति होने के बावजूद किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से रजिस्ट्री किए जाने की बात सामने आई थी। इसके अतिरिक्त, कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों की भूमिका और टोकन दिलाने के नाम पर कथित वसूली की शिकायतें भी मिली थीं। इन मामलों की गंभीरता को देखते हुए आकस्मिक निरीक्षण कराया गया तथा संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई।

जांच के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें भूमि महिला के नाम पर थी, लेकिन उसकी बिक्री पुरुष द्वारा किए जाने की बात सामने आई। कलेक्टर के अनुसार, ऐसी स्थिति में संबंधित उप-पंजीयक का दायित्व था कि पंजीयन से पहले दस्तावेजों, भूमि के स्वामित्व और विक्रेता के अधिकारों की समुचित जांच सुनिश्चित की जाती। प्रथम दृष्टया आवश्यक जांच में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई है।

एक अन्य मामले में जबेरा उप-पंजीयक के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव की भूमि की रजिस्ट्री बटियागढ़ में किए जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि इस प्रक्रिया में जबेरा कार्यालय की पोर्टल लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग किया गया। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित तथ्यों की जांच और जिम्मेदारी निर्धारित करने की बात कही है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर यादव ने जिला पंजीयक और सभी उप-पंजीयकों को निर्देश दिए हैं कि पंजीयन कार्यालयों में शासन द्वारा निर्धारित शुल्क की जानकारी सूचना पटल और दीवारों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री लेखन के लिए निर्धारित शुल्क एक हजार रुपये है। इसके अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क, पंजीयन शुल्क, पंचायत उपकर तथा अन्य लागू शुल्क का विवरण संबंधित दस्तावेज के प्रथम पृष्ठ पर अंकित रहता है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे निर्धारित शुल्क के अनुसार ही भुगतान करें और बिना किसी वैध आधार के अतिरिक्त राशि न दें।

पंजीयन कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों की भूमिका और टोकन के नाम पर कथित वसूली की शिकायतों पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। कलेक्टर ने कहा कि नागरिकों को पंजीयन संबंधी सेवाएं नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। किसी भी व्यक्ति द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगे जाने, टोकन के नाम पर परेशान किए जाने अथवा अनावश्यक भुगतान के लिए दबाव बनाए जाने पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ऐसी शिकायतें स्थापित कंट्रोल रूम नंबर, संबंधित अनुविभागीय अधिकारी अथवा जिला पंजीयक के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचाएं। संबंधित अधिकारियों के संपर्क नंबर पंजीयन कार्यालयों में प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। शिकायत के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं होने पर नागरिक कलेक्टर के आधिकारिक फेसबुक पेज के माध्यम से भी प्रशासन को अवगत करा सकते हैं।

कलेक्टर ने कहा कि पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना, भूमि के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों की समुचित जांच सुनिश्चित करना और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से बचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनियमितताओं और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के मामलों में जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव