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स्वदेशी अपनाकर देश को आर्थिक और सामरिक रूप से मजबूत बनाएं : रामेश्वर शर्मा

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स्वदेशी अपनाकर देश को आर्थिक और सामरिक रूप से मजबूत बनाएं : रामेश्वर शर्मा


भोपाल, 31 अक्टूबर (हि.स.)। भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना होगा। देश के लोगों को अपनी क्षमताओं और परंपराओं पर भरोसा रखना चाहिए। आज भारत जिस दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसमें स्वदेशी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

यह बात भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने शनिवार शाम को भोपाल में आयोजित स्वदेशी मेले को संबोधित करते हुए कही। स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन द्वारा यह स्वदेशी मेला 24 अक्टूबर से 04 नवंबर तक भोपाल के शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में आयोजित किया जा रहा है। मेले में देश और प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, लघु उद्यमों तथा स्वदेशी वस्तुओं को मंच उपलब्ध कराया गया है।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि आज भारत की स्थिति पहले से मजबूत हुई है और आने वाले समय में देश और आगे बढ़ेगा। स्वदेशी का भाव केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे अपने आचरण में उतारना होगा। घरों में महिलाएं और गृहिणियां इस भावना को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने माताओं और बहनों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार के सदस्यों को भी स्वदेशी के प्रति जागरूक करें।

उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग मौसम और ऋतुओं के अनुसार खान-पान और जीवनशैली की समृद्ध परंपरा रही है। यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है। आज भारत अपनी जरूरत की अनेक वस्तुओं का निर्माण स्वयं कर रहा है। रक्षा क्षेत्र में भी देश की क्षमता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से बनाए गए रक्षा उपकरणों और मिसाइलों की चर्चा दूसरे देशों में भी होती है। उनके अनुसार, हाल के सैन्य घटनाक्रमों में भी स्वदेशी तकनीक और हथियारों की क्षमता सामने आई है।

विधायक शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों और पूर्वजों ने ग्रहों, नक्षत्रों और उनके प्रभावों के बारे में पहले ही अध्ययन किया था। आज भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। देशवासियों को अपने देश की क्षमता पर संदेह नहीं करना चाहिए। अभी भारत ने चंद्रयान जैसे अभियान किए हैं और आने वाले समय में अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई और उपलब्धियां हासिल कर सकता है।

उन्होंने जी-20 सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विदेशी अतिथियों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन परोसे थे। इनमें इडली, मध्य प्रदेश का पोहा-जलेबी और दाल-बाफला जैसे व्यंजन शामिल थे। भारत की परंपरा सभी का भला चाहने की रही है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम स्वयं को पीछे रखें। पहले हमें अपने देश को मजबूत और समृद्ध बनाना होगा, तभी हम दुनिया को भी दिशा दे सकेंगे।

भाषा, खान-पान और दैनिक जीवन में भी अपनाएं स्वदेशी: कौशेंद्र तिवारी

कौशेंद्र तिवारी ने कहा कि स्वदेशी का विचार केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमारी भाषा, खान-पान और जीवनशैली भी स्वदेशी होनी चाहिए। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक दैनिक जीवन में स्वदेशी को अपनाने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने विदेशी कंपनियों के भारत में आने के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1608 में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई थी। आगे चलकर अंग्रेजों ने देश पर शासन किया और 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश शासन ने सीधे भारत की सत्ता अपने हाथ में ले ली। तिवारी ने कहा कि आज भी देश में छह हजार से अधिक विदेशी पंजीकृत कंपनियां काम कर रही हैं। ऐसे में हमें अपनी वस्तुओं और उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि देश फिर से किसी प्रकार की आर्थिक निर्भरता में न फंसे।

स्थानीय लघु उद्योगों को बाजार उपलब्ध कराना मेले का उद्देश्य: सतीश विश्वकर्मा

मेले की प्रस्तावना रखते हुए मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा ने कहा कि मेले का उद्देश्य केवल भारत या प्रदेश के बड़े उद्योगों को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि शहर में काम करने वाले छोटे और घरेलू उद्योगों को भी मंच उपलब्ध कराना है। कई लोग ऐसे उत्पाद बनाते हैं, जो हमारे रोजमर्रा के जीवन में आवश्यक होते हैं, लेकिन उन्हें अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने के लिए उचित मंच नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि कई बार हमें अपनी जरूरत की वस्तुओं के लिए विदेशी सामान खरीदना पड़ता है, जबकि उनके विकल्प स्थानीय स्तर पर भी उपलब्ध हो सकते हैं। हम अपने दैनिक जीवन में जितना अधिक स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे, उतनी ही छोटे उद्यमियों को सहायता मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। स्वदेशी के माध्यम से देश में आर्थिक क्रांति लाने का भी प्रयास किया जा सकता है।

पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता में 74 वर्षीय वंदना जी ने हासिल किया द्वितीय स्थान

मेले के आठवें दिन शनिवार को पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के स्थानीय, पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजन तैयार किए। प्रतियोगिता में संगीता तिवारी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि 74 वर्षीय वंदना टेलन द्वितीय स्थान पर रहीं। इस उम्र में प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लेना और अपनी पाक कला का प्रदर्शन करना विशेष रूप से सराहनीय रहा।

इस प्रतियोगिता में मेले के स्टॉल लगाने वाली कार्यकर्ता के साथ ही पीएम श्री विद्यालय के बच्चों ने भी भाग लिया। प्रतिभागियों ने महाराष्ट्र, पंजाब सहित देश के अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। इसके साथ ही मोटे अनाज से बने व्यंजन और पौष्टिक खिचड़ी भी प्रस्तुत की गई।

प्रभारी सीमा भारद्वाज ने प्रतियोगिता का उद्देश्य बताते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं को पिज्जा, बर्गर जैसे विदेशी खाद्य पदार्थों के बजाय भारतीय पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों की ओर आकर्षित करना था। इन व्यंजनों के माध्यम से स्वाद के साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा सकता है। आयोजकों का प्रयास है कि बच्चे अपने खान-पान में स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों को प्राथमिकता दें।

प्रतियोगिता में 74 वर्षीय वंदना टेलन ने मराठी पारंपरिक व्यंजन तैयार किए। उन्होंने रंगोली बनाकर उस पर अपने व्यंजनों को सजाया और आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को सराहा गया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पीएम श्री विद्यालय के बच्चों सहित सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।

भारतीय संस्कृति और परंपराओं पर आधारित रहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

मेले के आठवें दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम की थीम ‘हम और हमारा समाज’ रही। इसमें समूह भजन और स्वदेशी गीतों की प्रस्तुतियां हुईं। इसके साथ ही एक नृत्य समूह ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार और उनकी लीलाओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, भक्ति और परंपराओं की झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, महेंद्र चौहान, हरिओम सेन, वीरेंद्र पटेल, अंकिता सोनी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर