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परफेक्शन नहीं, आत्मविश्वास है सफलता का मूल मंत्र: पद्मश्री डॉ. शुभा अयंगर

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परफेक्शन नहीं, आत्मविश्वास है सफलता का मूल मंत्र: पद्मश्री डॉ. शुभा अयंगर


- उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विवि में एनजीएमएफटी-2026 का आगाज

उज्जैन, 21 जुलाई (हि.स.)। आत्मविश्वास पूर्णता से भी अधिक महत्वपूर्ण है। जीवन में आने वाली असफलताओं और चुनौतियों का निडर होकर सामना करते हुए मेहनत व लगन से काम करते रहना ही सफलता का असली मूल मंत्र है।

यह प्रेरक संदेश भारत की प्रसिद्ध एयरोस्पेस वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. शुभा अयंगर ने मंगलवार को उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं संकाय विकास कार्यक्रम (एनजीएमएफटी-2026) के भव्य उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिया। उन्होंने इस मौके पर अपने शोध कार्यों के साथ-साथ भारत की पहली स्वदेशी 'रनवे दृश्यता मापक प्रणाली (दृष्टि)' के विकास की यात्रा को विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों के साथ साझा किया।

शिक्षा रटने तक सीमित न रहे, समस्या-समाधान का केंद्र बने: कुलगुरु

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने उच्च शिक्षा में नवाचार, व्यावहारिक अनुभव और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल रटने का माध्यम नहीं, बल्कि स्थानीय और वैश्विक समस्याओं के समाधान का केंद्र बनने चाहिए।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए वैज्ञानिक नवाचार और युवा प्रतिभाओं को उद्योगों व आधुनिक शोध से जोड़ना आवश्यक है। यह सम्मेलन केवल शोध-पत्रों के प्रस्तुतीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि अकादमिक जगत, उद्योगों और शोधार्थियों के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करेगा।

अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ का औपचारिक शुभारंभ

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के रसायन एवं बायोकेमिस्ट्री अध्ययनशाला, भौतिकी अध्ययनशाला तथा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के सहयोग से आयोजित इस पाँच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन का औपचारिक शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मंच पर कुलसचिव डॉ. अनिल शर्मा, कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. उमा शर्मा, डॉ. संजय वर्मा, डॉ. मंजूषा मीमरोठ एवं डॉ. उमेश कुमार सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।

स्कूली छात्रों ने सीखीं वैज्ञानिक बारीकियां

सम्मेलन के दौरान स्कूली विद्यार्थियों के लिए आयोजित विशेष 'लैब विजिट' में ऑक्सफोर्ड, उत्कृष्ट, नारायणा, उज्जैन पब्लिक स्कूल, कार्मेल कॉन्वेंट, मॉडल स्कूल, आर.के. बंसल और सेंट थॉमस जैसे प्रमुख विद्यालयों के 170 विद्यार्थियों ने भाग लिया। संकाय सदस्यों और स्कॉलर्स के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने यू.वी. विजिबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, फ्लेम फोटोमीटर, आयन एक्सचेंज क्रोमैटोग्राफी तथा फॉरेंसिक साइंस में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक उपकरणों की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझा।

देश-विदेश के वैज्ञानिकों का मंथन

सम्मेलन में देश-विदेश के 130 से अधिक विशेषज्ञों ने पंजीयन कराया है। तकनीकी सत्रों के दौरान डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. दिब्येंदु बाग ने 'नेक्स्ट जनरेशन मैटेरियल्स' और सीएसआईआर-एम्परी भोपाल की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अर्चना बाजपेयी ने 'इलेक्ट्रोकैटलिस्ट फॉर हाइड्रोजन जनरेशन' विषय पर व्याख्यान दिए। अंत में शोधार्थियों द्वारा 10 मौखिक तथा 10 पोस्टर प्रस्तुतियां दी गईं।

कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि पीएम-ऊषा और एएनआरएफ-पेयर के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम उज्जैन को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा। आयोजन समिति में डॉ. शैलेश कुंदलवाल, डॉ. स्वाति दुबे, डॉ. कमलेश दशोरा और डॉ. गणपत अहीरवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर