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मप्रः जबलपुर बरगी क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोग गठित

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मप्रः जबलपुर बरगी क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोग गठित


मप्रः जबलपुर बरगी क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोग गठित


भोपाल, 10 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में नर्मदी नदी पर बने बरगी बांध में क्रूज दुर्घटना के कारण जनहानि दुर्भाग्यपूर्ण घटना की न्यायिक जांच के लिए राज्य शासन ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग की नियुक्ति की है।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा रविवार रात इस इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्य शासन ने 'जांच आयोग अधिनियम, 1952' की धारा-3 के तहत यह आयोग गठित किया है। आयोग राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से तीन माह के भीतर अपनी जांच पूर्ण करेगा और रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत करेगा।

आयोग दुर्घटना के कारणों की सूक्ष्मता से जांच करेगा और उत्तरदायित्व का निर्धारण करेगा। इसके साथ ही, आयोग द्वारा दुर्घटना के दौरान और उसके उपरांत किए गए बचाव उपायों की पर्याप्तता तथा राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आयोग राज्य में नौकाओं, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियों के संचालन और रखरखाव के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP ) तैयार करेगा। राज्य में संचालित सभी नौकाओं, क्रूज और जल क्रीड़ा गतिविधियों का ऑडिट करेगा और इनलैंड वेसेल्स एक्ट, 2021 और एनडीएमए बोट सेफ्टी गाइडलाइंस, 2017 के मानकों के अनुरूप जलयानों के प्रमाणीकरण की व्यवस्था करेगा। ऐसे सभी स्थानों पर, जहां नागरिक जल परिवहन, नौका, क्रूज एवं जल क्रीडा गतिविधियां संचालित की जा रही है वहां त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team) के गठन की व्यवस्था के लिए भी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

गौरतलब है कि जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी बांध में 30 अप्रैल को शाम 5:00 से 6 बजे के बीच तेज आंधी-तूफान के कारण मध्य प्रदेश टूरिज्म का एक क्रूज डूब गया था। इस दुर्घटना में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 लोगों को बचा लिया गया था। घटना के बाद अब तक राज्य सरकार की ओर से जांच पूरी नहीं की गई है और न ही इस मामले में किसी के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। यहां तक की पर्यटन विभाग के अधिकारी इस लीपा पोती में लगे हुए हैं कि उनकी कोई गलती नहीं थी बल्कि प्राकृतिक आपदा थी। हालांकि, इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें जांच के साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर