बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के लिए भोपाल में हुई राज्य स्तरीय कार्यशाला, हुआ गहन मंथन
- सभी 55 जिलों की बाल कल्याण समितियों के अध्यक्ष हुए शामिल
भोपाल, 17 जुलाई (हि.स.) । मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा शुक्रवार को राजधानी स्थित विज्ञान भवन में 'लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012' (पॉक्सो एक्ट) एवं 'किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015' के प्रभावी क्रियान्वयन पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में रेडक्रॉस सोसाइटी के महासचिव रमेन्द्र सिंह, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (एम.पी.सी.एस.टी) के महानिदेशक अनिल कोठारी और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा सहित 55 जिलों की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शामिल थे।
बाल कल्याण समितियों की कार्यप्रणाली में एकरूपता लाना मुख्य उद्देश्य
इस राज्य स्तरीय विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के बाल संरक्षण ढांचे को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और उत्तरदायी बनाना था। इस दौरान विभिन्न जिलों के व्यावहारिक अनुभवों और वहां की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा किया गया, जिससे पूरे राज्य में बाल कल्याण के मामलों के निपटारे में एकरूपता, विधिक शुद्धता और प्रशासनिक दक्षता स्थापित की जा सके।
कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक चुनौतियों पर गहन मंथन
विशेषज्ञों द्वारा आयोजित प्रशिक्षण सत्रों में पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के व्यावहारिक एवं विधिक पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिनिधियों को बाल संरक्षण संबंधी वैधानिक प्रावधानों, जांच और प्रक्रियात्मक कार्यवाही तथा बालकों के सर्वोत्तम हित के सिद्धांतों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया गया। साथ ही संकटग्रस्त और पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, पुनर्स्थापन, बेहतर केस प्रबंधन, सीसीआई समन्वय, उचित रिकॉर्ड संधारण और आयोग की रिपोर्टिंग प्रणाली को सुगम बनाने की दिशा में गहन प्रशिक्षण दिया गया।
संवेदनशील व्यवहार और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने पर बल
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को रोकने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर सभी अंगों का समन्वय आवश्यक है। कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ित बच्चों को मनोसामाजिक सहयोग और समग्र पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं बाल अधिकारों के प्रति काम करने वाले अमले की क्षमता और संवेदनशीलता को बढ़ाकर कानूनों के धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करती हैं। कार्यशाला में न्यायपालिका के अधिकारी, विभिन्न शासकीय विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और गैर-सरकारी संगठन शामिल थे।।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

