home page

मप्रः मुख्यमंत्री 2 मई को करेंगे इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन

 | 
मप्रः मुख्यमंत्री 2 मई को करेंगे इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन


भोपाल, 29 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश में औद्योगिक प्रगति को नई गति देने और निवेश के लिए दीर्घकालिक आधार तैयार करने की दिशा में इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रथम चरण एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 2 मई को इस परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन करेंगे।

जनसम्पर्क अधिकारी बबीता मिश्रा ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक संरचना को अधिक संगठित, सक्षम और निवेश का आदर्श गंतव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा, जिसमें अधोसंरचना, उद्योग और शहरी विकास को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण, नीति समर्थन और बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार कार्य किया जा रहा है। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी क्रम में एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत करता है, जहां औद्योगिक गतिविधियों, वाणिज्यिक विस्तार और नागरिक सुविधाओं का संतुलित समावेश सुनिश्चित किया गया है। यह परियोजना निवेशकों को एक सुव्यवस्थित, पूर्व नियोजित और अधोसंरचना से परिपूर्ण स्थान उपलब्ध कराएगी, जिससे उद्योगों की स्थापना और विस्तार की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकेगी।

कनेक्टिविटी आधारित विकास: लॉजिस्टिक्स दक्षता और क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा

जनसम्पर्क अधिकारी के अनुसार, इंदौर-पीथमपुर इकॉनामिक कॉरिडोर 20.28 कि.मी. लंबाई में फैलाव के साथ इन्दौर एयरपोर्ट के समीप सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से सीधे जोड़ेगा। परियोजना का विस्तार 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है, जिसके समुचित विकास के लिए कुल 2360 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अधोसंरचना की दृष्टि से 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क के साथ दोनों ओर सुव्यवस्थित बफर ज़ोन विकसित किया जाएगा, जो इस कॉरिडोर को एक आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तार योग्य स्वरूप प्रदान करेगा। यह मार्ग एनएच-47 और एनएच-52 को जोड़ते हुए न केवल इन्दौर शहर के यातायात दबाव को कम करेगा, बल्कि माल परिवहन की गति और विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा। इस कनेक्टिविटी का प्रभाव केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह औद्योगिक इकाइयों के लिए लागत में कमी, समय की बचत और सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार के रूप में भी सामने आएगा, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बनेगा।

निवेश सशक्तिकरण का आधार : औद्योगिक क्लस्टर्स का एकीकरण

उन्होंने बताया कि इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, पीथमपुर निवेश क्षेत्र, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, पीएम मित्र पार्क और विक्रम उद्योगपुरी जैसे प्रमुख औद्योगिक स्थानों को एकीकृत रूप में जोड़ते हुए एक मजबूत औद्योगिक नेटवर्क तैयार करेगा। इस प्रकार का समेकित विकास निवेशकों को अलग-अलग स्थानों के बजाय एक संगठित इकोसिस्टम में कार्य करने का अवसर प्रदान करता है, जहां कनेक्टिविटी, संसाधन और बाजार तक पहुंच एक साथ उपलब्ध होती है। इससे बड़े निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार अधिक सुव्यवस्थित ढंग से हो सकेगा। साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी बड़े उद्योगों के साथ जुड़कर आगे बढ़ने के अवसर विकसित होंगे।

सेक्टर-आधारित विकास: आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स को नई ऊर्जा

जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि यह कॉरिडोर इन्दौर को आईटी और फिनटेक गतिविधियों के लिए एक सशक्त स्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहायक सिद्ध होगा। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज होने की संभावनाएं हैं। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और इन्दौर की स्थापित औद्योगिक पहचान को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना विभिन्न सेक्टरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती है। लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, तेज कनेक्टिविटी और नियोजित अधोसंरचना उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाएगी, जिससे प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकेगा।

संतुलित शहरीकरण और भविष्य उन्मुख अधोसंरचना का विकास

उन्होंने बताया कि इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, उज्जैन-इन्दौर मेट्रोपॉलिटन रीजन में एक महत्वपूर्ण विकास धुरी के रूप में कार्य करेगा। यह परियोजना केवल औद्योगिक विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत वाणिज्यिक, आवासीय और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का भी नियोजित विकास किया जाएगा, जिससे एक संतुलित और सुव्यवस्थित शहरी संरचना विकसित हो सके। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह कॉरिडोर बहुविकल्पीय कनेक्टिविटी, ट्रैफिक प्रबंधन और बड़े आयोजनों के दौरान सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा। इस प्रकार यह परियोजना दीर्घकालिक शहरी और आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और शहरी विस्तार को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है, जो मध्यप्रदेश को एक संतुलित, सक्षम और प्रतिस्पर्धी आर्थिक प्रणाली की ओर अग्रसर करेगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर