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मप्रः मुख्यमंत्री ने जबलपुर के डुमना नेचर से किया कैच द रेन अभियान का शुभारंभ

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मप्रः मुख्यमंत्री ने जबलपुर के डुमना नेचर से किया कैच द रेन अभियान का शुभारंभ


- मियावाकी पद्धति से शहर में 11 लाख पौधे रोपने के कार्य की भी शुरुआत की

जबलपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने शनिवार को अपने जबलपुर प्रवास के दौरान डुमना नेचर पार्क में कैच द रेन अभियान के तहत वर्षा जल संचयन प्रणाली तथा शहर की वायुगुणवत्ता को सुधारने मियावाकी पद्धति से 11 लाख पौधे लगाने के कार्य का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रकृति और जल का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। जल ही जीवन का आधार है, इसलिए वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने मियावाकी पद्धति को पर्यावरण संरक्षण की एक प्रभावी एवं वैज्ञानिक तकनीक बताते हुये कहा कि इसके माध्यम से कम समय में घने और आत्मनिर्भर वन विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि नगर निगम जबलपुर द्वारा जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय है, जो अन्य नगरीय निकायों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेंगे। उन्होंने इस अवसर पर नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, विधायकगण अशोक ईश्वरदास रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे, सुशील कुमार तिवारी, नीरज सिंह ठाकुर व संतोष वरकड़े, मध्य प्रदेश तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष विनोद गोटिया, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन, जिला पंचायत अध्यक्ष आशा गोंटिया, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष अखिलेश जैन, भाजपा दिव्यांगजन प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप रजक, भाजपा के नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर एवं भाजपा के जिला अध्यक्ष (ग्रामीण) राजकुमार पटेल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

कैच द रेन अभियान के तहत वर्षा जल संचयन प्रणाली का शुभारंभ :-

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डुमना नेचर पार्क में कैच द रेन अभियान के अंतर्गत वर्षा जल संचयन प्रणाली (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम) का विधिवत शुभारंभ किया। यह प्रणाली 10 हजार वर्गफुट रूफ एरिया से प्राप्त वर्षा जल का संग्रहण कर 30 फीट गहरे रिचार्ज बोर के माध्यम से भू-जल पुनर्भरण सुनिश्चित करेगी। इस पहल का उद्देश्य वर्षा जल का स्थानीय स्तर पर संरक्षण करना तथा भू-जल स्तर में सुधार लाना है।

एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण :-

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत बरगद, पीपल एवं नीम के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर शहर की वायु गुणवत्ता सुधार के लिये मियावाकी पद्धति से 11 लाख पौधों के रोपण अभियान का शुभारंभ भी मुख्यमंत्री ने किया। इस अभियान का उद्देश्य हरित क्षेत्र का विस्तार, जैव विविधता का संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण तथा भावी पीढ़ियों के लिए समृद्ध प्राकृतिक विरासत का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में मौजूद स्कूली बच्चों से मिले और उनका अभिवावदन स्वीकार किया।

क्या है मियावाकी पद्धति :-

मियावाकी पद्धति जापान के प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित वृक्षारोपण तकनीक है। इसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधों को सघन रूप से लगाया जाता है, जिससे कम समय में घना, प्राकृतिक और आत्मनिर्भर वन विकसित होता है। इस तकनीक से पौधों की वृद्धि तेज होती है, जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है तथा कार्बन अवशोषण, वायु शुद्धिकरण और पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान मिलता है। यही कारण है कि शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के लिए यह पद्धति अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर