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गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


- इंदौर में आकार लेगा प्रदेश का पहला सिंधु कला केंद्र, भूमिपूजन समारोह में वर्चुअली शामिल हुए मुख्यमंत्री

भोपाल, 16 सितम्बर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्राचीनतम सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास हम सभी को एक गौरवशाली अतीत से परिचित करवाता है। स्वाभिमान से जीवन जीने के प्रतीक बन चुके सिंधी समाज की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास से इंदौर में आयोजित सिंधु कला केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज का कठिनाइयों से भरा लंबा संघर्ष रहा है। उनकी जीवटता और कर्मठता हर किसी को प्रभावित करती है। उनकी मधुर बोली और स्वभाव सबका दिल जीत लेती है।

उन्होंने कहा कि सिंधी समाज ने विभाजन की विभिषिका झेली है। उन्होंने अपनी जन्म भूमि-घर और व्यापार छोड़ा लेकिन अपने संस्कार के साथ धर्म और हौसला नहीं खोया। अनेक बार चुनौतियों को अवसर में बदलकर अपनी पहचान और गौरव को संजोए रखने वाले सिंधी समाज पर प्रदेशवासियों को गर्व है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर में सिंधु कला केंद्र का भव्य और दिव्य भवन बनकर तैयार होगा, जो सिंधी समाज की कला, संस्कृति और विरासत से भविष्य की पीढ़ियों को परिचित कराएगा। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज के महापुरुषों की जीवनी जिनमें वीर राजा दाहिर, समाज सुधारक और संत कंवरराम और शहीद हेमू कालानी शामिल हैं, स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर राज्य सरकार ने अपना वादा निभाया है। मुख्यमंत्री ने भगवान झूलेलाल का जयकारा लगाते हुए भूमि-पूजन कार्यक्रम में उपस्थित जन समुदाय को आश्वासन दिलाया कि वे सिंधु कला केंद्र के लोकार्पण कार्यक्रम में जरूर आएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्म दिवस पर 17 सितम्बर को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इंदौर पधार रहे हैं। वे लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की नगरी से एक माह तक चलने वाले सेवा से संकल्प अभियान, स्वामित्व योजना का शुभारंभ करेंगे एवं विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

सिंधु सभ्यता की गौरवशाली विरासत, संस्कृति, कला और परंपराओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में इंदौर ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। “सिंधु सभ्यता से संस्कृति तक” की संकल्पना पर आधारित मध्य प्रदेश के प्रथम सिंधु कला केंद्र, इंदौर का भूमिपूजन समारोह सम्पन्न हुआ। इंदौर में भूमि-पूजन कार्यक्रम में सांसद शंकर लालवानी, ईश्वर झामनानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सिंधी समाज के प्रतिष्ठित जन उपस्थित थे।

यह केवल भवन नहीं, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक होगा-दिलीप लखी

कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी लखी ग्रुप के चेयरमैन दिलीप लखी ने की। उन्होंने कहा कि सिंधु कला केंद्र की नींव रखी जा रही है, यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि हमारी हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, कला और इतिहास का जीवंत प्रतीक बनेगा। यह केंद्र में सिंधु सभ्यता से जुड़े महापुरुषों एवं गौरवशाली विरासत के सजीव चित्रण, प्रदर्शनियों और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से हमारी समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। यहां सिंधु सभ्यता के नगर नियोजन, जल प्रबंधन, व्यापार, शिल्पकला, मुहरों, आभूषणों और दैनिक जीवन से संबंधित विषयों को आधुनिक तकनीक और दृश्य माध्यमों के जरिए प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा। यह प्रयास विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, इतिहास और गौरवशाली विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

ईस्वर जामनानी ने कहा कि इस केन्द्र को समाज की संस्कृति और इतिहास को सुरक्षित रखना केवल वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। सिंधु कला केंद्र इस दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

सांसद एवं सिंधु हेरिटेज ट्रस्ट के अध्यक्ष शंकर लालवानी ने बताया कि सिंधु कला केंद्र की परिकल्पना का मुख्य उद्देश्य सिंधु सभ्यता की समृद्ध विरासत, कला, संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को एक स्थान पर संरक्षित एवं प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि सिंधु सभ्यता केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस केंद्र के माध्यम से समाज की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित हो सके।

लालवानी ने कहा कि इंदौर में बनने वाला यह केंद्र सिंधु की कला, संस्कृति और विरासत का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यहां विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों, प्रदर्शनियों, कला एवं विरासत से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से सिंधु सभ्यता की समृद्ध परंपरा को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों, संस्कृति और गौरव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प है। समाज के सहयोग और सहभागिता से यह केंद्र एक व्यापक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर