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कांग्रेस की महिला विरोधी सोच फिर सामने आई, ‘जनता देगी जवाब: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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कांग्रेस की महिला विरोधी सोच फिर सामने आई, ‘जनता देगी जवाब: मुख्यमंत्री डॉ. यादव


भोपाल, 17 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा में महिला सशक्तिकरण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की महिला विरोधी सोच एक बार फिर सामने आ गई है। जनता इस पूरे घटनाक्रम को देख रही है। आने वाले समय में इसका जवाब जरूर देगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार देर शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इतना महत्वपूर्ण विधेयक पास न होना देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को झटका देने जैसा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक बड़ा कदम था, जिससे राजनीति और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ती। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से इस बिल का समर्थन नहीं किया, जो कि महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीति करना उचित नहीं है। यह देश की माताओं और बहनों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

विपक्षी दलों की महिला-विरोधी मानसिकता उजागरः खंडेलवाल

वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश की महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन इसके पारित न होने से करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने इस बिल का विरोध कर अपनी महिला-विरोधी मानसिकता को उजागर किया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए जरूरी था। पार्टी नेताओं ने इसे “आधी आबादी” के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से इसका समर्थन नहीं किया। सत्तारूढ़ पक्ष ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार को महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध बताते हुए कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है। हालांकि, विपक्ष के विरोध के चलते इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित नहीं किया जा सका।

लोकसभा में हाल ही में महिला सशक्तिकरण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश किया गया था, जिसमें महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान था। यह बिल लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, विपक्षी दलों के विरोध के चलते यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जिससे देशभर में राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर