मप्र सरकार आंगनवाड़ी के 20 बच्चों को मधुमक्खियों के हमले से बचाकर खुद की जान गंवाने वाली कंचनबाई के परिवार को देगी चार लाख की सहायता
- राजस्थान की डिप्टी सीएम ने नीमच की महिला की वीरता को किया सलाम
भोपाल, 05 फरवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में आंगनवाड़ी केंद्र के 20 बच्चों को मधुमक्खियों के हमले से बचाकर खुद जान गंवाने वाली महिला कंचनबाई मेघवाल के परिवार को मध्य प्रदेश सरकार चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इसकी घोषणा की है।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि नीमच जिले के ग्राम रानपुर में मधुमक्खियों के डंक से आंगनवाड़ी में कार्यरत बहन कंचन बाई मेघवाल का असमय निधन अत्यंत दुखद व हृदयविदारक है। प्रदेश सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके परिवार के साथ है। इस घटना में मानवीय आधार पर मैंने कंचन बहन के परिवार को चार लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिये हैं। उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी राज्य सरकार उठाएगी। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति एवं परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति दें।
वहीं, कंचनवाई की वीरता पर राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने उन्हें नमन किया है। दीया कुमारी ने कहा है कि कंचन बाई का यह बलिदान हर महिला की करुणा, साहस और अदम्य शक्ति को उजागर करता है। दूसरी ओर भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने भी कंचनबाई की वीरता को सलाम करते हुए बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा की मांग की है।
राजस्थान की डिप्टी सीएम दीया कुमार ने एक्स पर किए गए पोस्ट में कहा है कि मध्य प्रदेश के नीमच में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल द्वारा दिखाया गया साहस, मातृत्व, कर्तव्य और महिला सशक्तिकरण का सर्वोच्च उदाहरण है। मधुमक्खियों के हमले के बीच 20 मासूम बच्चों को सुरक्षित बचाने के लिए उन्होंने चटाइयों और तिरपाल से बच्चों को ढकते हुए माँ की तरह उनका संरक्षण किया और स्वयं सैकड़ों डंक सहन किए। उनका यह त्याग दर्शाता है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समाज की संवेदनशील संरक्षक होती हैं जो संकट की घड़ी में अपने दायित्व को सर्वोपरि रखती हैं। कंचन बाई का यह बलिदान हर महिला की करुणा, साहस और अदम्य शक्ति को उजागर करता है। उनका यह प्रेरणादायी बलिदान महिला सशक्तिकरण और मातृत्व की प्रेरक मिसाल बनकर सदैव स्मरणीय रहेगा।
वहीं, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने एक्स पर लिखा है कि मध्य प्रदेश के जिला नीमच में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल जी ने अद्भुत साहस और इंसानियत का परिचय देते हुए मधुमक्खियों के हमले से 20 नन्हे बच्चों की जान बचाई। तारपोलिन से बच्चों को ढककर वे स्वयं मानव ढाल बन गईं और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। मां कंचन बाई मेघवाल का यह कृत्य मानवता का सर्वोच्च उदाहरण है। वे अपने पीछे दो नन्ही बेटियां और एक बेटा छोड़ गई हैं। हम सभी उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हैं और हम @MP_MyGov से मांग करते हैं कि कंचन बाई मेघवाल के बच्चों को आर्थिक सहायता एवं आजीवन निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाए, साथ ही कंचन बाई मेघवाल को राजकीय सम्मान दिया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके अदम्य साहस और इंसानियत से प्रेरणा ले सकें।
नीमच जिले के रानपुर गांव की घटना बीते सोमवार की है। इस दिन आंगनवाड़ी में काफी बच्चे थे। केंद्र की सहायिका बाकी बच्चों को लेने गई थी। इसी दौरान वहां मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। पास में ही स्वसहायता समूह की अध्यक्ष 45 वर्षीय कंचनबाई का घर है जो घर के पास मौजूद हैंडपंप पर कपड़े धो रही थीं। बच्चों पर हमला देख घर से दरी और कंबल लेकर दौड़ी और आनन-फानन सारे बच्चों को दरी और कंबल से घेरा बनाकर सुरक्षित किया। इस दौरान मधुमक्खियों ने कंचनबाई को काटा। इसके बाद डायल 112 से अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनका निधन हो गया। कंचन बाई अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गई हैं। उनकी इस बहादुरी को सलाम किया जा रहा है और सरकार से परिवार को सहायता देने की मांग उठ रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

