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कृषि संस्कृति, अन्नदाता के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की हमारी परंपरा को आगे बढ़ाना आवश्यक : टेटवाल

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कृषि संस्कृति, अन्नदाता के सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की हमारी परंपरा को आगे बढ़ाना आवश्यक : टेटवाल


- सारंगपुर के ग्राम पांदा में श्री घरणीघर भगवान जन्मोत्सव एवं बलराम कृषि महोत्सव का भव्य आयोजन

भोपाल, 02 सितंबर (हि.स.)। भारतीय संस्कृति में किसान और कृषि को सदैव सम्मान का स्थान प्राप्त रहा है। खेत , जल, मिट्टी और प्रकृति के संरक्षण के बिना समृद्ध कृषि की कल्पना संभव नहीं है। भगवान श्री बलराम कृषि, हल और धरती से जुड़े श्रम के प्रतीक हैं। उनके जन्मोत्सव जैसे आयोजन हमारी कृषि परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ अन्नदाता के सम्मान का भाव भी मजबूत करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के साथ उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जल एवं भूमि संरक्षण के लिए जनभागीदारी बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

यह बात मध्य प्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने बुधवार को सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पांदा में आयोजित श्री घरणीघर भगवान जन्मोत्सव एवं श्री बलराम कृषि महोत्सव के कार्यक्रम में कही।

मंत्री टेटवाल ने कहा कि पेड़ केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य से भी जुड़े हैं। कृषि संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े विषय हैं। समाज में इनके प्रति जागरूकता बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

चल समारोह में शामिल हुए मंत्री टेटवाल

ग्राम पांदा में श्री घरणीघर भगवान जन्मोत्सव एवं श्री बलराम कृषि महोत्सव के अवसर पर भव्य चल समारोह निकाला गया। मंत्री टेटवाल ने चल समारोह में शामिल होकर भगवान श्री बलराम जी की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और किसानों की उन्नति की कामना की। इसके बाद उन्होंने ग्राम पांदा स्थित श्री घरणीघर राधाकृष्ण मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा और जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

कृषि परंपरा और किसान जीवन से जुड़ा महोत्सव

श्री बलराम कृषि महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि परंपरा और किसान जीवन से गहराई से जुड़ा आयोजन है। भगवान श्री बलराम को कृषि, हल और धरती से जुड़े श्रम का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में उनके जन्मोत्सव का विशेष महत्व है।

महोत्सव के माध्यम से कृषि संस्कृति, अन्नदाता के सम्मान और खेती-किसानी के महत्व का संदेश दिया गया। भगवान श्री बलराम जी के जीवन और उनसे जुड़े कृषि संदेशों को स्मरण करते हुए किसानों की मेहनत, धरती के प्रति जिम्मेदारी और कृषि परंपराओं के संरक्षण का भाव भी सामने आया।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण

महोत्सव के अवसर पर धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जोड़ा गया। मंत्री टेटवाल ने शासकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण किया। उन्होंने पौधारोपण के माध्यम से जल, भूमि और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पौधारोपण केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए किया गया संकल्प है। पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।

धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों का संदेश

ग्राम पांदा में आयोजित यह महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों को जोड़ने वाला आयोजन रहा। भगवान श्री बलराम जी के जन्मोत्सव के अवसर पर आयोजित कृषि महोत्सव ने ग्रामीण जीवन में खेती और किसान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। वहीं पौधारोपण कार्यक्रम ने प्रकृति संरक्षण की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।

कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की। चल समारोह के दौरान गांव का वातावरण उत्साह और भक्ति से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्री बलराम जी एवं श्री घरणीघर भगवान के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।

इस अवसर पर पूर्व विधायक गुलाब सिंह सुस्तानी, प्रदेश किसान मोर्चा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह, जनपद अध्यक्ष देवनारायण नागर, जनपद उपाध्यक्ष कैलाश नागर सहित ग्रामीणजन एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

नई पीढ़ी को कृषि संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से ग्रामीण अंचल में कृषि संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी किया गया। भगवान श्री बलराम जी के जीवन और उनसे जुड़े कृषि संदेशों को स्मरण करते हुए किसानों के सम्मान, उनकी मेहनत और धरती के प्रति जिम्मेदारी का भाव सामने आया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर