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भोपालः वन विहार में रन फॉर टाइगर का भव्य आयोजन, 600 नागरिकों ने लगाई बाघ संरक्षण की दौड़

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भोपालः वन विहार में रन फॉर टाइगर का भव्य आयोजन, 600 नागरिकों ने लगाई बाघ संरक्षण की दौड़


भोपालः वन विहार में रन फॉर टाइगर का भव्य आयोजन, 600 नागरिकों ने लगाई बाघ संरक्षण की दौड़


- प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प

भोपाल, 26 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के राष्ट्रीय उद्यान वन विहार में बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के उपलक्ष्य में बाघ सप्ताह-2026 के अंतर्गत रविवार को रन फॉर टाइगर'' का आयोजन किया गया। आयोजन वन विभाग द्वारा किया गया, जिसमें लगभग 600 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वन विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश को देश के टाइगर स्टेट'' के रूप में जाना जाता है। यहां बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध जैव विविधता, स्वस्थ वनों और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है। बाघों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि हमारे वन, जल-स्रोत और पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ एवं संतुलित हैं। इन्हीं मूल्यों को समाज तक पहुँचाने के उद्देश्य से वन विहार में बाघ संरक्षण सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।

रविवार को आयोजित रन फॉर टाइगर में लगभग 600 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें स्कूली विद्यार्थी, युवा, महिलाएँ, वरिष्ठ नागरिक, पर्यावरण प्रेमी, वन अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल थे। यह जन-भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि वन्यजीव संरक्षण अब केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व बनता जा रह है। 5 किलोमीटर की दौड़ वन भवन से प्रारंभ होकर निर्धारित मार्ग से होते हुए पुनः वन भवन पर सम्पन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री शुभरंजन सेन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समीता राजोरा सहित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया।

बाघ बचेंगे तो जंगल बचेंगे, जंगल बचेंगे तो जीवन बचेगा

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने कहा कि बाघ हमारे वनों के सर्वोच्च शिकारी हैं और उनकी उपस्थिति पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ होने का संकेत देती है। यदि बाघ सुरक्षित हैं तो इसका अर्थ है कि हमारे जंगल, वनस्पति, जल-स्रोत और हजारों अन्य वन्यजीव भी सुरक्षित हैं। इसलिए बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति की रक्षा नहीं, बल्कि सम्पूर्ण प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का प्रयास है। उन्होंने सभी धावकों से आह्वान किया कि वे बाघ संरक्षण के एम्बेसडर बनकर अपने परिवार, मित्रों और समाज में वन एवं वन्यजीव संरक्षण का संदेश पहुँचाएँ। प्रत्येक प्रतिभागी यदि अपने आसपास के लोगों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने का संकल्प ले, तो यह जागरूकता लाखों लोगों तक पहुँच सकती है।

स्थानीय समुदाय हैं बाघ संरक्षण की सबसे बड़ी शक्ति

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समीता राजोरा ने कहा कि बाघ संरक्षण की वास्तविक सफलता तब मिलेगी जब स्थानीय समुदाय, विशेषकर वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोग, इस अभियान के साझेदार बनेंगे। इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की थीम भी यही संदेश देती है कि स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों को केंद्र में रखकर ही बाघों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि 'रन फॉर टाइगर' केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि समाज को प्रकृति के साथ जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम है। जब बच्चे, युवा, महिलाएँ और वरिष्ठ नागरिक एक साथ बाघ संरक्षण के लिए दौड़ते हैं, तो यह संदेश दूर-दूर तक पहुँचता है कि वन्यजीवों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 'रन फॉर टाइगर' केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि समाज को प्रकृति के साथ जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम है। जब बच्चे, युवा, महिलाएँ और वरिष्ठ नागरिक एक साथ बाघ संरक्षण के लिए दौड़ते हैं, तो यह संदेश दूर-दूर तक पहुँचता है कि वन्यजीवों का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रतियोगिता एवं सम्मान

प्रतियोगिता को चार आयु वर्गों-जूनियर (18 वर्ष से कम), वेटरन्स (19-45 वर्ष), सीनियर वेटरन्स (45-60 वर्ष) तथा सीनियर सिटीजन (60 वर्ष से अधिक)- में आयोजित किया गया। प्रत्येक वर्ग के पुरुष एवं महिला विजेताओं को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार तथा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। 12 वर्ष तक के बच्चों को भी सांत्वना पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।

कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक मनोज अग्रवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक बी.एस. अन्निगेरी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट) मोहन मीणा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) कृष्णमूर्ति, प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश लघु वनोपज संघ श्रीमती कमलिका मोहंता, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एच.एस. मोहंता, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अजय यादव एवं वन संरक्षक (भोपाल वृत्त) क्षितिज कुमार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सेवानिवृत्त उप वन संरक्षक ए.के. खरे द्वारा किया गया। मध्यप्रदेश एथलेटिक्स एसोसिएशन द्वारा कार्यक्रम के सफल आयोजन में विशेष सहयोग प्रदान किया गया, जिसके लिए वन विभाग ने उनका आभार व्यक्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर