अनूपपुर: तेलुगू भाषा में मां नर्मदा महात्म की दिव्य सप्तदिवसीय कथा का हुआ समापन
अनूपपुर, 26 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की पावन तीर्थ नगरी अमरकंटक स्थित मृत्युंजय आश्रम में आदिशक्ति परांमबा भगवती मां नर्मदा जी के दिव्य महात्म का सप्त दिवसीय कथा महोत्सव गुरूवार को सम्पन्न हुआ।
21 से 27 फरवरी तक आयोजित यह अलौकिक कथा तेलुगू भाषा में त्रिभाषा सहस्त्रावधानी, प्रकांड विद्वान पंडित वददी परत्ती पद्माकर द्वारा भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत की जा रही है। इस पावन अवसर पर आश्रम परिसर निरंतर वेद-मंत्रों की गूंज, हरिनाम संकीर्तन और नर्मदा स्तुति से आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत बना हुआ था। कथा के प्रत्येक दिवस में मां नर्मदा की उत्पत्ति, तप, महिमा, तीर्थ स्वरूपता, मोक्षदायिनी कृपा तथा भक्त-जीवन में उनके आध्यात्मिक महत्व का विस्तारपूर्वक वर्णन किया जा रहा है। श्रद्धालु भक्ति-भाव से कथा श्रवण कर आत्मिक शांति, सद्बुद्धि और जीवन में धर्ममय मार्ग का संकल्प ग्रहण कर रहे हैं।
नर्मदा महात्म कथा के श्रवण हेतु आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के दूर-दराज से लगभग 400 से अधिक भक्त-श्रद्धालु अमरकंटक पहुंचे थे।
श्रद्धालु प्रातःकाल नर्मदा उद्गम क्षेत्र में पूजन-अर्चन कर कथा स्थल पर दिव्य प्रवचनों का रसास्वादन कर रहे हैं। तेलुगू भाषाई भक्ति परंपरा में प्रस्तुत यह कथा सांस्कृतिक समन्वय और आध्यात्मिक एकता का अनुपम उदाहरण बनी रही है।
कथाव्यास पंडित वददी परत्ती पद्माकर महाराज अपनी धर्मपत्नी रंगबत्ती, शिष्यों एवं अनुयायियों के साथ अमरकंटक में उनके सान्निध्य में आयोजित कथा में हैदराबाद, विशाखापट्टनम तथा दक्षिण गोदावरी क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी बने हुए हैं। आश्रम में प्रतिदिन दीप प्रज्ज्वलन, गुरु वंदना, नर्मदा आरती, भजन-कीर्तन और सामूहिक प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का आरंभ होता है। कथा व्यास द्वारा नर्मदा महिमा का वर्णन करते हुए बताया जा रहा है कि मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं, अपितु सनातन संस्कृति की जीवंत आध्यात्मिक धारा हैं, जिनका स्मरण मात्र से मन, वचन और कर्म की पवित्रता का मार्ग प्रशस्त होता है।
सप्ताह भर चलने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना का अवसर है, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता, भाषाई समरसता और सनातन परंपरा की अखंड ज्योति का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है। मृत्युंजय आश्रम में इन दिनों भक्ति, साधना और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहाँ प्रत्येक श्रद्धालु मां नर्मदा की कृपा प्राप्त कर आत्मिक शांति का अनुभव कर रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

