भाजपा विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट से राहत, आपराधिक अवमानना की कार्रवाई समाप्त
जबलपुर, 22 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक संजय पाठक को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने न्यायाधीश को कॉल और संदेश भेजने से जुड़े आपराधिक अवमानना प्रकरण में उनका बिना शर्त माफीनामा स्वीकार करते हुए कार्रवाई समाप्त कर दी। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति नहीं होने की चेतावनी भी दी।
मामला हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा को फोन कॉल और संदेश भेजे जाने से जुड़ा था। इस घटनाक्रम पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए विधायक संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई प्रारंभ की थी। अंतिम सुनवाई के बाद खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाया गया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की खंडपीठ ने सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाते हुए कहा कि संबंधित घटनाक्रम से न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं हुई। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी न्यायाधीश से इस प्रकार संपर्क करने का प्रयास न्यायिक मर्यादा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
पिछली सुनवाई के दौरान संजय पाठक ने अदालत में बिना शर्त हलफनामा प्रस्तुत कर अपनी गलती स्वीकार की थी। उन्होंने कहा था कि न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा को उनसे अनजाने में कॉल लग गया था। इसके बाद केवल अपना परिचय देने के उद्देश्य से उन्होंने एक संदेश भेजा था। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीश के मोबाइल पर केवल एक सिंगल रिंग का मिस्ड कॉल गया था और इसके लिए वह बिना शर्त क्षमा याचना कर चुके हैं।
सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता आर्यन उरमालिया ने पक्ष रखा था। बहस के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा था कि केवल कॉल करना एक अलग विषय हो सकता है, लेकिन उसके बाद संदेश भेजकर परिचय देना न्यायिक मर्यादा के विपरीत है और प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना के दायरे में माना जा सकता है। हालांकि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने विधायक संजय पाठक का बिना शर्त माफीनामा स्वीकार कर उनके खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्यवाही समाप्त कर दी।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

