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भारतीय संस्कृति और सेवा भाव ही सशक्त समाज की आधारशिला : मंत्री कुशवाह

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भारतीय संस्कृति और सेवा भाव ही सशक्त समाज की आधारशिला : मंत्री कुशवाह


- मंत्री कुशवाह ने राज्य स्तरीय कार्यशाला को किया संबोधित

भोपाल, 14 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि भारत की संस्कृति, परंपराएं और पारिवारिक मूल्य हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। ग्रामीण क्षेत्रों की समरस संस्कृति, सामाजिक सहभागिता तथा महिलाओं की सक्रिय भूमिका भारतीय जीवन मूल्यों को सशक्त बनाती है। बुजुर्गों का सम्मान, उनकी सेवा और परिवार के प्रति जिम्मेदारी सदैव से भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। वर्तमान समय में इन मूल्यों को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

मंत्री कुशवाह मंगलवार को सामाजिक न्याय विभाग के सभागार में राज्य स्तरीय कार्यशाला क्रिएटिंग अ वेल फंक्शनिंग केयर इकॉनोमी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार समाज के प्रत्येक कमजोर एवं वंचित वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विभाग सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, वरिष्ठ नागरिक कल्याण तथा पुनर्वास सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

मंत्री कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर आज 190 से अधिक देशों ने योग को अपनाया है। योग स्वस्थ जीवन का आधार है तथा भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ हमें अपनी पारंपरिक जीवनशैली, संतुलित खान-पान और प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों को भी अपनाना चाहिए।

मंत्री कुशवाह कहा कि परिवार और समाज में वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए। समय की कमी और बदलती जीवन शैली के कारण पारिवारिक संवाद कम हो रहे हैं, जबकि बुजुर्गों का अनुभव नई पीढ़ी के लिए अमूल्य धरोहर है। समाज में संस्कारों और सकारात्मक विचारों को सुदृढ़ करने के लिए ऐसे संवाद और कार्यशालाएं अत्यंत आवश्यक हैं।

मंत्री कुशवाह ने कहा कि प्रदेश में 80 से अधिक वृद्धाश्रम संचालित हैं तथा अनेक संस्थाएं वरिष्ठ नागरिकों और जरूरतमंदों की सेवा में कार्यरत हैं। सेवा, संवेदनशीलता और मानव कल्याण भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि समाज में जनजागरूकता बढ़ाने तथा सेवा संस्कृति को मजबूत करने के लिए ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग समय-समय पर चिंतन शिविर एवं कार्यशालाओं का आयोजन करता है, जिससे दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों तथा अन्य जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए उपयोगी सुझाव प्राप्त होते हैं। विभाग भविष्य में केयर इकोनॉमी को सुदृढ़ बनाने के लिए नीति एवं कार्य योजना तैयार करेगा, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को बेहतर देखभाल एवं सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, सामाजिक न्याय श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर, आयुक्त, दिव्यांगजन अजय खेमरिया, आयुक्त, सामाजिक न्याय कृष्ण गोपाल तिवारी, अध्यक्ष, परशुराम कल्याण बोर्ड विष्णु राजोरिया तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, राज्य नीति आयोग ऋषि गर्ग सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत