मंदसौर में रावण को पूजा जाता है, प्रतिमा के आगे से महिलाएं घूंघट डाल के निकलती है
मंदसौर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार मंदसौर को रावण का ससुराल माना जाता है, यानी उसकी पत्नी मंदोदरी का मायका। यहां के खानपुरा क्षेत्र में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की प्रतिमा स्थापित है, जिसके 10 सिर हैं,प्रतिमा की लगभग ऊंचाई 35 फिट हैं।
रावण मंदसौर का दामाद था, इसका कोई वैध प्रमाण तो नहीं है लेकिन प्राचीन मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी नामदेव समाज की थी इसलिए खानपुरा क्षेत्र की नामदेव समाज की महिलाएं जब प्रतिमा के सामने पहुंचती हैं तो घूंघट डाल लेती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में दशहरे के मौके पर रावण के पुतलों का दहन किया जाता हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर में जहां रावण का दहन तो होता ही है उसकी पूजा भी की जाती है।
मंदसौर में तो लोग रावण को अपने क्षेत्र का दामाद मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं। यहां की बहुएं रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट डालकर जाती हैं। मंदसौर जिले पूर्व में इस जिले को दशपुर के नाम से पहचाना जाता था। यहां के खानपुरा क्षेत्र में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की प्रतिमा स्थापित है, जिसके 10 सिर हैं।
सीता माता का हरण करने के कारण रावण की बुद्धि भ्रष्ट होने की वजह से प्रतीक के रूप में उसके सिर पर गधे का सिर लगा रखा हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशहरा के दिन यहां के नामदेव समाज के लोग प्रतिमा के समक्ष उपस्थित होकर पूजा-अर्चना करते हैं। उसके बाद राम और रावण की सेनाएं निकलती हैं। रावण के वध से पहले लोग रावण के समक्ष खड़े होकर क्षमा-याचना मांगते हैं। वे कहते हैं, आपने सीता माता का हरण किया था, इसलिए राम की सेना आपका वध करने आई है।
उसके बाद प्रतिमा स्थल पर अंधेरा छा जाता है और फिर उजाला होते ही राम की सेना उत्सव मनाने लगती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रावण मंदसौर का दामाद था, इसलिए महिलाएं जब प्रतिमा के सामने पहुंचती हैं तो घूंघट डाल लेती हैं।
मान्यता है कि इस प्रतिमा के पैर में धागा बांधने से बीमारी नहीं होती। यही कारण है कि अन्य अवसरों के अलावा महिलाएं दशहरे के मौके पर रावण की प्रतिमा के पैर में धागा बांधती हैं। कई महिलाएं संतान सुख के लिए भी मन्नत मांगी जाती हैं। नगर पालिका द्वारा हाल ही में प्रतिमा का रंग रोगन भी करवाया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

