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मातृ एवं बाल मृत्यु नियंत्रण में मंदसौर जिला प्रदेश में अव्वल

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मातृ एवं बाल मृत्यु नियंत्रण में मंदसौर जिला प्रदेश में अव्वल


मंदसौर, 21 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टर - कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की गई। इस दौरान स्वास्थ्य, पोषण, मातृ एवं बाल मृत्यु नियंत्रण सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मंदसौर एनआईसी कक्ष में कलेक्टर अदिती गर्ग, अपर कलेक्टर एकता जायसवाल, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अनुकूल जैन सहित स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा बैठक में प्रदेशभर में स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई। बाल मृत्यु नियंत्रण के क्षेत्र में मंदसौर जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 99.5 प्रतिशत सफलता प्राप्त की। वहीं मातृ मृत्यु दर के नियंत्रण में जिले ने शत-प्रतिशत सफलता हासिल की। इसके साथ ही एनसीडी कंट्रोल रेट में भी मंदसौर जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। इन उपलब्धियों के साथ मंदसौर जिला स्वास्थ्य सूचकांकों में प्रदेश में अव्वल रहा।

कलेक्टर अदिती गर्ग ने जानकारी दी कि जिले में प्रत्येक मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु की समय पर एवं सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाती है। संस्था स्तर एवं समुदाय स्तर पर प्रत्येक प्रकरण की गंभीरता से समीक्षा की जाती है। साथ ही जिला स्तर पर प्रतिमाह नियमित समीक्षा बैठक आयोजित कर आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप मातृ एवं बाल मृत्यु की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।

कलेक्टर अदिती गर्ग की दूरदर्शिता से मंदसौर बच गया छिंदवाड़ा और इंदौर बनने से

ऐसा नहीं है कि मंदसौर कलेक्टर के कार्यो से मंदसौर पहली बार अव्वल आया हो। आपको बता दें कि पहले छिंदवाड़ा और उसके बाद इंदौर दोनों ही जगह पर बडी प्रशासनिक चूक देखने को मिली जिसका खामियाजा हमेशा की तरह आम जनता को भुगतना पड़ा। छिंदवाडा और इंदौर से बड़ा घटनाक्रम मंदसौर में हो सकता था लेकिन प्रशासनिक तत्परता से मामला एक गांव से आगे नहीं बढ़ा पाया और एक बहुत बडी घटना होने से बच गई। मंदसौर के समीपस्थ ग्राम मुल्तानुपरा में आई बीमारी जीबीएस का यह भी एक प्रकार की दूषित पानी, गंदगी से होने वाली और छूआ छूत किस्म की बीमारी थी जिसे पैर पसारने से पहले की मंदसौर कलेक्टर की दूरदर्शिता से वहीं रोक दिया गया नहीं तो यह बीमारी विकरॉल रूप ले ली थी। उस समय मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अदिती गर्ग स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव में अलर्ट पर रखा था प्रत्येक घर की स्क्रीनिंग की जा रही थी स्थिति विकट दिखने पर कलेक्टर ने सेन्ट्रल की टीम को नई दिल्ली से बुला लिया और अनुभवी डॉक्टरो और जानकारों की सेन्ट्रल की टीम ने तत्काल बिमारी को पकड़ लिया और तत्काल इस पर नियंत्रण हो गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया