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नाबालिग के अपहरण और मानव तस्करी मामले में पांच दोषियों को 20-20 साल की सजा

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नाबालिग के अपहरण और मानव तस्करी मामले में पांच दोषियों को 20-20 साल की सजा


मैहर, 13 अगस्त (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के मैहर पुलिस की प्रभावी विवेचना और अभियोजन की मजबूत पैरवी के चलते नाबालिग बालिका के अपहरण, मानव तस्करी और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामले में न्यायालय ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अमरपाटन अनुभाग के विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मानवेन्द्र पवार ने थाना रामनगर के अपराध क्रमांक 277/2023 में गुरुवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध अपहरण, मानव तस्करी और नाबालिग से संबंधित यौन अपराधों के आरोप प्रमाणित पाए।

अभियोजन के अनुसार, 15 जून 2023 की सुबह करीब 5 बजे नाबालिग बालिका घर के बाहर पानी भरने गई थी। इसी दौरान भोपाल निवासी राजू मेवाड़ा ने एक अन्य साथी की मदद से उसे मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपहरण कर लिया। इसके बाद आरोपितों ने बालिका को सुनील गौर नामक व्यक्ति के हाथ 40 हजार रुपये में बेच दिया।

अभियोजन के अनुसार, सुनील गौर ने नाबालिग होने के बावजूद बालिका से विवाह किया और उसके साथ दैहिक संबंध बनाए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने नाबालिग की तलाश कर उसे सुरक्षित बरामद किया। पुलिस ने उसके बयान, चिकित्सकीय परीक्षण, दस्तावेजी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। इन साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

मामले के विवेचक उपनिरीक्षक भैयालाल रावत ने जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। वहीं विशेष लोक अभियोजक पंकज कुमार पटेल ने न्यायालय में साक्षियों और दस्तावेजी साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। अभियोजन की पैरवी और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी माना।

पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह ने जघन्य अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई और आरोपियों को कठोर सजा दिलाने के लिए थाना प्रभारियों को अभियोजन अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही साक्षियों से नियमित संपर्क रखने और न्यायालय में निर्धारित तारीखों पर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने पर जोर दिया गया है। पुलिस के अनुसार, इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि चिन्हित प्रकरण में आरोपियों को दोषसिद्ध कराने में सफलता मिली।

न्यायालय ने राजू मेवाड़ा, नीता रावत, सुनील गौर, दिनेश उर्फ देवनारायण गौर और भूरीबाई कोल को दोषी ठहराया। सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 366, 370(4), 120-बी तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 सहपठित धारा 16 के तहत 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी