मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति में आरटीआई लागू न होने पर उठे सवाल, पारदर्शिता को लेकर बढ़ी मांग
मैहर, 11 मई (हि.स.)। मध्यप्रदेश के मैहर स्थित मां शारदा देवी मंदिर की प्रबंध समिति में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (आरटीआई) लागू न होने को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। धार्मिक नगरी में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर वर्षों से मंदिर प्रबंध समिति को सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर क्यों रखा गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे समिति के कामकाज में पारदर्शिता प्रभावित हुई है और पुराने आर्थिक अनियमितताओं पर पर्दा पड़ा रहा।
जानकारी के अनुसार, पूर्व में समिति से जुड़े कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा यह तर्क दिया जाता रहा कि मां शारदा मंदिर प्रबंध समिति को शासन से प्रत्यक्ष राजस्व प्राप्त नहीं होता, इसलिए यह संस्था आरटीआई अधिनियम के दायरे में नहीं आती। इसी आधार पर लंबे समय तक सूचना के अधिकार के तहत आवेदन स्वीकार नहीं किए गए और श्रद्धालुओं व नागरिकों को समिति के कार्यों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समिति के अध्यक्ष स्वयं जिला कलेक्टर होते हैं, जबकि समिति का प्रशासनिक संचालन एसडीएम स्तर के अधिकारियों की निगरानी में होता है। इसके अलावा मंदिर व्यवस्था मध्यप्रदेश शासन के धर्मस्व एवं न्यास विभाग के अंतर्गत संचालित होती है और समय-समय पर शासकीय ऑडिट भी कराया जाता है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब समिति का संचालन प्रशासनिक ढांचे के तहत हो रहा है और शासन स्तर पर बड़े प्रोजेक्ट्स में बजट खर्च किया जा रहा है, तो फिर समिति को आरटीआई के दायरे से बाहर कैसे रखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि पूर्व में समिति की संपत्तियों, दुकानों, ठेकों और अन्य व्यवस्थाओं में कथित अनियमितताएं हुईं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक न हो सके, इसलिए सूचना के अधिकार को प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि यदि आरटीआई लागू होती, तो समिति के वित्तीय लेन-देन, किराया वसूली, ठेकों और खर्चों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती थी।
इधर, अब लोगों की निगाहें नवागत कलेक्टर विदिशा मुखर्जी पर टिकी हैं। श्रद्धालुओं और नागरिकों को उम्मीद है कि मंदिर प्रबंध समिति में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू कराने की दिशा में पहल की जाएगी, जिससे समिति के कामकाज में पारदर्शिता बढ़े और कथित अनियमितताओं पर अंकुश लग सके।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मां शारदा का दरबार करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और यहां की व्यवस्थाओं में पूर्ण पारदर्शिता जरूरी है, ताकि मंदिर की आय और संपत्तियों का उपयोग जनहित एवं धार्मिक व्यवस्था के अनुरूप सुनिश्चित हो सके।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

