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भारी वाहनों की आवाजाही से बदहाल हुईं मैहर की ग्रामीण सड़कें, मरम्मत और जवाबदेही पर सवाल

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भारी वाहनों की आवाजाही से बदहाल हुईं मैहर की ग्रामीण सड़कें, मरम्मत और जवाबदेही पर सवाल


मैहर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। औद्योगिक गतिविधियों के बीच मैहर की ग्रामीण सड़कों की बदहाली का मुद्दा सामने आया है। अल्ट्राटेक वर्क्स मैहर सीमेंट के भारी वाहनों की आवाजाही को इन मार्गों पर बढ़ते दबाव की वजह बताया जा रहा है। ग्रामीण सड़कों की खराब स्थिति से आम लोगों के आवागमन में परेशानी होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सड़कों के रखरखाव, मरम्मत और जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भदनपुर माइंस मोड़ से बराखुर्द मार्ग की स्थिति को लेकर ग्रामीणों की चिंता सामने आई है। इसी तरह सरलानगर से सगमनिया मार्ग पर भारी औद्योगिक वाहनों की आवाजाही और सड़क पर पड़ने वाले दबाव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इन रास्तों का इस्तेमाल ग्रामीणों के साथ विद्यार्थियों और मरीजों सहित आम नागरिकों को आवागमन के लिए करना पड़ता है। ऐसे में सड़कों की खराब स्थिति का असर स्थानीय लोगों पर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।

सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी?

इन ग्रामीण मार्गों को लेकर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि विभाग ने संबंधित सड़कों को उद्योग प्रबंधन के हवाले कर दिया है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित सड़कों के संबंध में कोई समझौता या अनुमति दी गई है या नहीं। यदि ऐसी कोई व्यवस्था है, तो उसकी शर्तों और रखरखाव की जिम्मेदारी को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों की परेशानी के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कों को नुकसान पहुंचा है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। इस संबंध में सड़कों की तकनीकी जांच कराकर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन करने और नियमानुसार मरम्मत की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीण मार्गों की स्थिति को लेकर स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इन सड़कों का निरीक्षण हुआ है या नहीं, मरम्मत के लिए कोई कार्ययोजना तैयार की गई है या नहीं और सुधार कार्य कब तक पूरा होगा, इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। ग्रामीणों को राहत देने के लिए संबंधित अधिकारियों की ओर से ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता जताई जा रही है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भूमिका भी इस मामले में अहम मानी जा रही है। ग्रामीण सड़कों की समस्या को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने, निरीक्षण कराने और मरम्मत की समयसीमा तय कराने के लिए पहल किए जाने की जरूरत है।

औद्योगिक गतिविधियों के साथ जनसुविधाओं का ध्यान भी जरूरी

मैहर में औद्योगिक गतिविधियों का अपना महत्व है, लेकिन इनके साथ आम नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं और आवागमन को सुरक्षित बनाए रखना भी जरूरी है। यदि भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण मार्गों पर दबाव बढ़ रहा है, तो उसके अनुरूप सड़क की स्थिति, भार वहन क्षमता और रखरखाव की व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।

भदनपुर माइंस मोड़–बराखुर्द और सरलानगर–सगमनिया मार्ग का निरीक्षण कराकर सड़क की स्थिति का आकलन करने, आवश्यक मरम्मत की योजना बनाने और जिम्मेदारी स्पष्ट करने की मांग उठ रही है। साथ ही भारी वाहनों के संचालन से जुड़े नियमों और सड़क रखरखाव की व्यवस्था को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

फिलहाल, इन मार्गों की मरम्मत को लेकर किसी आधिकारिक समयसीमा या जिम्मेदारी तय किए जाने की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को राहत मिलने के लिए संबंधित विभागों की कार्रवाई का इंतजार है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी