मैहर में नर हाथी ई-5 की निगरानी तेज, सात गांवों में विशेष सतर्कता
मैहर, 10 सितंबर (हि.स.)। मध्यप्रदेश के मैहर जिले में नर हाथी ई-5 की गतिविधियों पर वन विभाग लगातार नजर बनाए हुए है। वनमंडल मैहर के अमरपाटन परिक्षेत्र अंतर्गत बीट गोरसरी के कक्ष क्रमांक 605 में मौजूद हाथी के व्यवहार और विचरण की विशेषज्ञ दल द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। बीते 48 घंटे में हुई घटनाओं और हाथी के व्यवहार का मूल्यांकन करने के बाद वन विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुरूप आवश्यक प्रबंधन उपाय किए जाने का निर्णय लिया है।
जिला वनमंडल अधिकारी विद्याभूषण मिश्रा ने बताया कि नर हाथी ई-5 का क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया, उप संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया, वन संरक्षक वन वृत्त रीवा, वनमंडलाधिकारी मैहर और वन्यप्राणी चिकित्सकों के दल द्वारा समुचित अनुश्रवण किया गया। विशेषज्ञों ने हाथी के व्यवहार के साथ पिछले 48 घंटे में हुई घटनाओं का भी आकलन किया है।
वन विभाग के अनुसार हाथी पिछले 24 घंटे से कक्ष क्रमांक 605 स्थित अपने प्राकृतिक आवास में ही मौजूद है। इस दौरान उसकी गतिविधियां सामान्य और प्राकृतिक देखी गई हैं। रेडियो कॉलर से लगातार प्राप्त हो रहे आंकड़ों का विषय विशेषज्ञ दल विश्लेषण कर रहा है। हाथी के व्यवहार और विचरण की स्थिति के आधार पर क्षेत्र में जरूरत के मुताबिक प्रबंधकीय कदम उठाए जा रहे हैं।
वन विभाग हाथियों की सुरक्षा के लिए आवश्यकतानुसार विद्युत विच्छेदन भी करा रहा है। संभावित रूप से प्रभावित गांवों में ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए गहन मुनादी कराई गई है। विभाग ने नागरिकों से हाथी से पर्याप्त सुरक्षात्मक दूरी बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल हाथी का विचरण प्राकृतिक वन्यजीव गलियारे में हो रहा है। उसके कैमोर श्रेणी के समानांतर रीवा और सीधी जिले की ओर प्रवास करने की संभावना भी बन रही है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आमजन की सुरक्षा के साथ हाथी की सुरक्षा भी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हाथी के कारण यदि किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचता है तो राजस्व पुस्तक परिपत्र में उल्लेखित प्रावधानों के तहत नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
वन विभाग के मुताबिक वर्तमान में नर हाथी ई-5 के अमरपाटन वन परिक्षेत्र के गोरसरी घाटी के नीचे स्थित ग्राम ओबरा, चोरखरी, भीषमपुर, पठरा, अमझर और छांईन सहित आसपास के गांवों में पहुंचने की संभावना बनी हुई है। इसके मद्देनजर इन गांवों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई है।
ग्रामीणों से कहा गया है कि हाथी की मौजूदगी की जानकारी मिलते ही तत्काल वन विभाग अथवा जिला प्रशासन के अधिकारियों को सूचना दें। विभाग और पुलिस प्रशासन के सहयोग से हाथी की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है।
वन विभाग ने लोगों से हाथी के करीब जाने से स्पष्ट रूप से बचने की अपील की है। जंगल में बिना अनुमति प्रवेश नहीं करने, हाथी के साथ फोटो या सेल्फी लेने के प्रयास में अपनी जान जोखिम में नहीं डालने तथा उसे टॉर्च अथवा तेज रोशनी दिखाकर उकसाने से बचने को कहा गया है।
अधिकारियों ने नागरिकों को हाथी से कम से कम 200 मीटर की दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार हाथी से सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही किसी अप्रिय घटना से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। हाथी को खेत से बाहर निकालने अथवा उसे किसी स्थान से हटाने की कोशिश में भी लोग उसके पास न जाएं।
वन विभाग ने जंगल के किनारे स्थित कच्चे मकानों में हाथी के विचरण के दौरान नहीं रहने की सलाह दी है। ऐसे समय में ग्रामीणों को ग्राम पंचायत भवन, सामुदायिक भवन जैसे पक्के मकानों में सुरक्षित रहने को कहा गया है।
वन विभाग का अमला हाथी की गतिविधियों का गहन अनुश्रवण कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विभाग की प्राथमिकता एक ओर जहां ग्रामीणों और उनकी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर हाथी को भी किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

