विंध्य के लिए बड़ी सौगात: देश की सबसे लंबी जल सुरंग तैयार, किसानों को मिलेगा नर्मदा का पानी
सतना, 15 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से चली आ रही सिंचाई की उम्मीद अब साकार होने के करीब है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे लंबी 11.952 किलोमीटर जल सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है। इसके साथ ही मैहर, सतना और रीवा जिले के करीब 1,450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
इस परियोजना के पूरा होने से विंध्य क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और हजारों किसानों को वर्षभर कृषि कार्य के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे फसल उत्पादन बढ़ने के साथ क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
वर्षों पुराने आंदोलन को मिली नई पहचान
नर्मदा जल को विंध्य तक पहुंचाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। इस अभियान में पूर्व विधायक रामप्रताप सिंह की सक्रिय भूमिका को प्रमुख माना जाता है। उन्होंने इस मुद्दे को किसानों के अधिकार से जोड़ते हुए जनआंदोलन का स्वरूप दिया और नागौद के खेरुआ सरकार मंदिर से संकल्प लेकर नर्मदा जल आंदोलन की शुरुआत की। इसके बाद गांव-गांव जाकर किसानों को इस अभियान से जोड़ा गया।
आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने के लिए नर्मदा सेनानियों का गठन किया गया, जिन्होंने बरगी परियोजना का पानी विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाने की मांग को लगातार जनस्तर पर उठाया।
मुख्यमंत्री के साथ हुआ था परियोजना का निरीक्षण
अप्रैल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कटनी के स्लीमनाबाद स्थित जल सुरंग का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उस दौरान पूर्व विधायक रामप्रताप सिंह भी परियोजना से जुड़े तकनीकी और किसान हितों के मुद्दों पर चर्चा के लिए मौजूद थे।
नर्मदा संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार, निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने रामप्रताप सिंह के बारे में जानकारी ली और उन्हें तत्काल टनल स्थल पर बुलाने के निर्देश दिए। इसके बाद दोनों ने परियोजना का निरीक्षण किया और विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा जल पहुंचाने से जुड़े तकनीकी पहलुओं एवं किसानों की जरूरतों पर चर्चा की।
किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
परियोजना पूरी होने के बाद मैहर, सतना और रीवा जिले के हजारों किसानों को सिंचाई के लिए नर्मदा का पानी उपलब्ध हो सकेगा। इससे वर्षा पर निर्भरता कम होगी, खेती की उत्पादकता बढ़ेगी और लंबे समय से बनी सिंचाई की समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
संघर्ष और जनसहभागिता की मिसाल
समाजसेवी उमेश चतुर्वेदी 'लालन' ने कहा कि विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए नर्मदा जल केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि वर्षों की उम्मीद, संघर्ष और जनसंकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, इस अभियान को किसानों के अधिकार से जोड़कर लगातार जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के समक्ष उठाया गया, जिसका परिणाम आज दिखाई दे रहा है।
जल सुरंग के निर्माण के पूरा होने के साथ अब विंध्य क्षेत्र में नर्मदा जल पहुंचाने की प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र के कृषि विकास और किसानों की आजीविका को व्यापक लाभ मिल सकेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

