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अर्धनारीश्वर, वीरभद्र और कामदेव प्रसंग से मंत्रमुग्ध हुआ महालोक

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अर्धनारीश्वर, वीरभद्र और कामदेव प्रसंग से मंत्रमुग्ध हुआ महालोक


उज्जैन, 18 जनवरी (हि.स.)। श्री महाकाल महोत्सव के अंतर्गत रविवार रात श्री महाकाल महालोक, उज्जैन में शिव-भक्ति पर आधारित भव्य नृत्य-नाट्य प्रस्तुति आयोजित की गई। इस अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संध्या में भगवान शिव के विविध रूपों, भावों और दर्शन को लोक एवं शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से मंच पर साकार किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम भाग में इंडोनेशिया से आए कलाकारों द्वारा कोकोरादा पुत्रा के निर्देशन में शिव-केंद्रित नृत्य-नाट्य प्रस्तुति दी गई। पारंपरिक वेशभूषा, सजीव मुद्राओं और भावपूर्ण नृत्याभिनय के माध्यम से शिव-तत्व की आध्यात्मिक अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रस्तुति में पौराणिक कथा पर आधारित कामदेव द्वारा भगवान शिव की तपस्या भंग करने के प्रसंग को अत्यंत जीवंत रूप में मंचित किया गया। नृत्य के माध्यम से कामदेव के प्रयास, शिव की गहन तपश्चर्या, उनका रौद्र स्वरूप और अंततः आध्यात्मिक चेतना के उत्कर्ष को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावनात्मक रूप से गहराई से जोड़ा।

कार्यक्रम के दूसरे भाग में श्रीलंका की प्रसिद्ध सांस्कृतिक टोली द्वारा अरियारत्न कालारत्नि के निर्देशन में नृत्य-नाट्य प्रस्तुति दी गई। श्रीलंकाई लोक परंपरा और शिव आराधना के अद्भुत संगम से सजी यह प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रस्तुति भगवान शिव के अर्धनारीश्वर एवं वीरभद्र स्वरूप पर केंद्रित रही, जिसमें शिव–शक्ति के अद्वैत भाव तथा वीरभद्र के रौद्र और न्यायकारी स्वरूप को सशक्त नृत्याभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। श्री महाकाल महोत्सव में इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ने भारतीय संस्कृति के साथ विश्व की विविध सांस्कृतिक परंपराओं के सुंदर संगम को दर्शाया। श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों ने इस भव्य प्रस्तुति की मुक्तकंठ से सराहना की।

इस अवसर पर समाजसेवी नरेश शर्मा एवं सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन कवि दिनेश दिग्गज के द्वारा किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल