मध्य प्रदेश के 48 जिलों में बारिश का संकट, किसानों की बढ़ी चिंता, अब तक औसत से कम गिरा पानी
- अगले तीन दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की संभावना
भोपाल, 07 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के 55 में से 48 जिलों में बारिश औसत से कम होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। कई इलाकों में बारिश की कमी 46 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका असर जलस्रोतों के साथ फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश की संभावना जताई है।
पूर्वी हिस्से में 23 प्रतिशत कम बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के पूर्वी हिस्से में आने वाले जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में अब तक औसत से 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में बारिश की कमी 1 से 46 प्रतिशत तक रही है।
वहीं पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में भी औसत से 16 प्रतिशत कम बारिश हुई है। आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे है।
सिर्फ 7 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी
प्रदेश में केवल सात जिले ऐसे हैं जहां बारिश औसत से अधिक हुई है। इनमें बड़वानी, ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन शामिल हैं। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिलों में सामान्य बारिश करीब 39 इंच मानी जाती है।
फसलों पर बढ़ा संकट
कम बारिश वाले इलाकों में सोयाबीन, धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों पर संकट गहराने लगा है। सब्जियों की खेती भी प्रभावित हो रही है। जबलपुर के पाटन क्षेत्र में धान के खेतों में नमी की कमी के कारण दरारें दिखाई देने लगी हैं। यहां अब तक महज 16.3 इंच बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक करीब 23.6 इंच पानी गिरना चाहिए था। उधर, उज्जैन संभाग में सोयाबीन की फसल पर इल्ली का असर किसानों की परेशानी बढ़ा रहा है। बारिश की कमी के बीच कीट प्रकोप से फसल की स्थिति और खराब होने की आशंका है।
अगले तीन दिन बारिश की उम्मीद
मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्से के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर और सागर में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह और निवाड़ी में हल्की बारिश होने की संभावना है।
सामान्य से 19% कम बारिश
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 16.3 इंच यानी 419.5 मिमी बारिश दर्ज हुई है। इस अवधि तक सामान्य बारिश 20.5 इंच यानी 519.8 मिमी होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में करीब 4.2 इंच यानी 19 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश की यह कमी जलस्रोतों और खरीफ फसलों दोनों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
बारिश की कमी से फसलों पर संकट, किसान परेशान
शाजापुर के किसान मुकेश ठाकुर के मुताबिक पर्याप्त बारिश नहीं होने से सोयाबीन की फसल प्रभावित हो रही है। फसल में इल्लियों का प्रकोप भी देखने को मिल रहा है, जिससे उत्पादन घटने की आशंका है। खेतों में नमी की कमी के चलते 35 से 40 दिन की सोयाबीन फसल में यलो मोजेक वायरस के लक्षण नजर आने लगे हैं।
किसान रूपेश सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल को बड़ा नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यलो मोजेक वायरस सफेद मक्खी के जरिए फैलता है और गंभीर संक्रमण की स्थिति में उपज में 85 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। महिला किसान संगीता ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर धान की फसल बोई थी, लेकिन बारिश की कमी से फसल खराब होने की स्थिति में पहुंच गई है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

