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मध्य प्रदेश सरकार का 'कृषक कल्याण वर्ष' केवल प्रचार, किसान बदहाल: कांग्रेस

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मध्य प्रदेश सरकार का 'कृषक कल्याण वर्ष' केवल प्रचार, किसान बदहाल: कांग्रेस


भोपाल, 13 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे किसानों के साथ छलावा और केवल प्रचार आधारित अभियान बताया। सोमवार को राजधानी भाेपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल और पूर्व प्रवक्ता राहुल राज ने आरोप लगाया कि प्रदेश का किसान खरीदी संकट, फसल बीमा की अव्यवस्था, खाद की कमी, बाजार में कम दाम, भ्रष्टाचार और बढ़ते कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, जबकि सरकार वास्तविक समाधान के बजाय प्रचार पर अधिक ध्यान दे रही है। इस दौरान कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, स्वदेश शर्मा, अभिनव बरोलिया और कुंदन पंजाबी भी मौजूद रहे।

शैलेंद्र पटेल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में मूंग का उत्पादन अधिक होने के बावजूद सरकार ने केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीदी को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि प्रति हेक्टेयर खरीदी सीमा घटाकर तीन क्विंटल कर दिए जाने से किसानों को अपनी अधिकांश उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने गेहूं और धान खरीदी को लेकर भी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि भाजपा ने संकल्प पत्र में गेहूं पर 2,700 रूपये प्रति क्विंटल भुगतान का वादा किया था, लेकिन किसानों को केवल 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया गया। वहीं धान खरीदी में भी मध्य प्रदेश के किसानों को अन्य राज्यों की तुलना में कम लाभ मिलने का दावा किया। कांग्रेस नेताओं ने सोयाबीन की कम कीमतों, भावांतर योजना में सीमित पंजीयन अवधि, सर्वर संबंधी समस्याओं तथा खाद की कमी और कालाबाजारी के मुद्दे भी उठाए। उनका आरोप था कि इन कारणों से बड़ी संख्या में किसान सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले सके।

पूर्व प्रवक्ता राहुल राज ने कहा कि कांग्रेस ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए उत्तरों, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की एफआईआर, केंद्रीय मंत्रालयों के दस्तावेजों तथा अन्य आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर कृषक कल्याण वर्ष–2026 आरोप-पत्र तैयार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान और गेहूं की विकेंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को कमजोर किया, जिससे किसानों को कठिन गुणवत्ता मानकों और कम कीमतों का सामना करना पड़ा। साथ ही उन्होंने उपार्जन, भंडारण और परिवहन में अनियमितताओं, गेहूं गायब होने, धान खरीदी में कथित गड़बड़ियों और फसल बीमा से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

राहुल राज ने बुरहानपुर में हाल की बारिश और आंधी से केले की फसल को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू करने तथा प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी भंडारण व्यवस्था और फसल बीमा से जुड़े मामलों में व्यापक अनियमितताएं हुई हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि प्रदेश में किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार को घोषणाओं के बजाय ठोस कदम उठाने चाहिए।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

- मूंग की खरीदी पर 25 प्रतिशत सीमा हटाकर एमएसपी पर 100 प्रतिशत खरीदी की जाए।

- गेहूं, धान और सोयाबीन पर संकल्प पत्र के अनुरूप अतिरिक्त बोनस दिया जाए।

- केला उत्पादकों के लिए मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू कर विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए।

- खाद की बढ़ी हुई कीमतें वापस ली जाएं तथा कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए।

- फसल बीमा में 'पटवारी हल्का' के बजाय 'खेत' को इकाई बनाया जाए।

- उपार्जन एवं बीमा से जुड़े कथित घोटालों की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे