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पर्युषण पर्व में श्रावक-श्राविकाएं धर्म के प्रति समर्पित रहे - मुनि श्री पवित्ररत्नजी

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पर्युषण पर्व में श्रावक-श्राविकाएं धर्म के प्रति समर्पित रहे - मुनि श्री पवित्ररत्नजी


मंदसौर, 05 सितंबर (हि.स.)। जैन धर्म व दर्शन में पर्युषण पर्व की विशिष्ट महत्ता है। पर्युषण पर्व में की गयी धर्म आराधना विशिष्ट फल प्रदान करती है। श्रावक-श्राविकाओं को पर्युषण पर्व में सामायिक, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय, पौषध एवं तप-तपस्या करे। पर्युषण पर्व के 8 दिवस में व्यापार-व्यवसाय पर ध्यान देने की बजाय धर्म आराधना, तप-तपस्या पर ध्यान देवे।

उक्त उद्गार मध्य प्रदेश के मंदसौर में जैन संत मुनिराज प्रत्यक्षरत्नविजयजी म. सा. की पावन उपस्थिति में राजेन्द्र विलास जीवागंज में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज पवित्ररत्नविजयजी म. सा. ने कहे। उन्होंने शनिवार को यहा धर्मसभा में कहा कि पर्युषण पर्व आत्मा के उत्थान का पर्व है। हम सब भी पर्युषण पर्व के 8 दिवस में अद्भुत धर्म आराधना करे। श्रावक-श्राविकाओं के 5 दैनिक कर्तव्य व 11 वार्षिक कर्तव्य जो जैन आगमों में बताये गये है उन्हें समझे। शास्त्र के वाचन को पूरा श्रवण करने का प्रयास करे। पर्युषण पर्व के 8 दिवस में छोटी-अद्भुत धर्म आराधना हो किस प्रकार पुण्य कर्म अर्जित करे। पर्युषण पर्व में भी तप-तपस्या करो तो इससे हमारा जीवन आत्म उद्धार की ओर अग्रसर होगा।

मुनीश्री ने कहा कि पर्युषण पर्व में क्रोध का बिल्कुल त्याग होना चाहिये। जीवन में हमारे समता भाव आवे इसका प्रयास करे। पर्युषण पर्व में धर्म में कोई ढिलाई नहीं होे। हमारा संघ राजेन्द्रसूरीश्वरजी म. सा. व पूण्य सम्राट जयंतसेन सूरिश्वरजी का संघ है है हम उनकी गौरवमयी परम्परा के अनुरूप धर्म आराधना व तप-तपस्या करे। आपने कहा कि 8 दिवस के पर्युषण पर्व के दौरान अहिंसा का पूरा पालन हो, घर परिवार में या बाहर किसी भी जीव की विरादना नहीं हो, इसके लिये जो भी नियम जैन आगमों में बताये है उन्हें पूरा करे। आपने कहा कि पर्युषण पर्व के 8 दिवस में पौषध करे तथा अपना पूरा समय स्वाध्याय करते हुए करे, निर्वहन करे। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धमार्लुजन उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया