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केसली में करीब 50 एकड़ जमीन का फर्जी नामांतरण, पटवारी की आईडी से कियोस्क संचालक पर कारनामा करने का आरोप

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केसली में करीब 50 एकड़ जमीन का फर्जी नामांतरण, पटवारी की आईडी से कियोस्क संचालक पर कारनामा करने का आरोप


सागर, 21 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले की केसली तहसील क्षेत्र में ऑनलाइन भू-अभिलेख व्यवस्था से जुड़ा गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है। पटनाखुर्द और बम्हनी गांव के कई किसानों की करीब 50 एकड़ पुश्तैनी कृषि भूमि का कथित रूप से फर्जी तरीके से नामांतरण कर पठा गांव निवासी ब्रजेन्द्र पिता भगवान सिंह यादव के नाम दर्ज कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद प्रभावित किसानों ने गुरुवार को तहसीलदार को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

मामले का खुलासा तब हुआ, जब किसानों के बैंक खातों में केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि की राशि आना बंद हो गई। इसके बाद किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर अपने भू-अभिलेखों की जानकारी ली। रिकॉर्ड में उनकी जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज मिलने पर किसान हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत तहसील प्रशासन से की।

पटवारी की सरकारी आईडी और पासवर्ड के इस्तेमाल का आरोप

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संबंधित हल्का पटवारी धीरज सिंह मरावी पुरानी भर्ती के कर्मचारी हैं और उन्हें कंप्यूटर संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं है। आरोप है कि ऑनलाइन काम कराने के लिए पटवारी अपनी शासकीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड स्थानीय कियोस्क अथवा कंप्यूटर सेंटर संचालकों को उपलब्ध कराते थे।

सूत्रों के मुताबिक इसी का फायदा उठाकर कियोस्क संचालक मोनू ने पटवारी की आईडी का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करते हुए किसानों की करीब 50 एकड़ जमीन का नामांतरण ब्रजेन्द्र यादव के नाम कर दिया। इस प्रक्रिया की जानकारी न तो संबंधित किसानों को समय पर हुई और न ही पटवारी को इसकी जानकारी होने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि संबंधित कियोस्क संचालक पूर्व में तहसील के आईटी सेल में भी काम कर चुका है। इसी पुराने परिचय और प्रशासनिक स्तर पर बने भरोसे के कारण उसे पटवारी की गोपनीय आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, पूरे मामले में वास्तविक जिम्मेदारी और अन्य लोगों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

तहसीलदार ने पटवारी की आईडी कराई ब्लॉक

मामला सामने आने के बाद केसली तहसीलदार देवीप्रसाद चक्रवर्ती ने संबंधित पटवारी की शासकीय आईडी ब्लॉक करा दी है। उन्होंने प्रभावित किसानों को आश्वस्त किया है कि जांच के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जमीन को पुनः मूल खातेदारों के नाम दर्ज कराया जाएगा।

तहसीलदार के अनुसार केसली एसडीएम फिलहाल अवकाश पर हैं। उनके लौटने के बाद मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। किसानों और ग्रामीणों ने कियोस्क संचालक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।

बैंक ऋण की साजिश की भी आशंका

प्रारंभिक पड़ताल में जमीन के फर्जी नामांतरण के पीछे आर्थिक लाभ की साजिश की आशंका भी जताई जा रही है। ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार कथित योजना फर्जी दस्तावेजों और नामांतरण के आधार पर संबंधित जमीन पर बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ऋण प्राप्त करने की हो सकती है।

आशंका यह भी जताई जा रही है कि ऋण की राशि हासिल करने के बाद जमीन को दोबारा मूल किसानों के नाम दर्ज कराने की योजना बनाई गई हो। इस पूरे मामले में स्थानीय बैंक कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका की आशंका भी सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

एसडीएम के लौटने के बाद होने वाली विस्तृत जांच में नामांतरण की प्रक्रिया, पटवारी की आईडी के इस्तेमाल, संबंधित दस्तावेजों, बैंक ऋण की संभावनाओं और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे