श्योपुरः किसानों ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव, खाद संकट को लेकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी
श्योपुर , 05 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को दोपहर 12 बजे सैकड़ों किसानों ने घेराव कर ऑनलाइन फार्मर आईडी एवं ई-टोकन व्यवस्था के कारण उत्पन्न खाद संकट, कालाबाजारी एवं किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने एवं कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शन के पश्चात किसानों ने डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार जैन को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री एवं मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उल्लेख किया कि वर्तमान ई-टोकन व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है तथा ग्रामीण क्षेत्रों के किसान समय पर खाद प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। किसानों ने मांग की कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर फार्मर आईडी एवं ई-टोकन बनाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है अथवा जिनका ई-टोकन नहीं बन पा रहा है, उन्हें आधार कार्ड के आधार पर तत्काल खाद उपलब्ध कराया जाए ताकि कोई भी किसान खाद से वंचित न रहे।
इस पर डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार जैन ने आगामी सोमवार से पंचायत स्तर पर फार्मर आईडी एवं ई-टोकन बनाने की व्यवस्था शुरू करने का आश्वासन दिया। किसानों ने खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं निजी दुकानदारों की अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई करने तथा उर्वरकों के बढ़े हुए दाम वापस लेने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने वाले किसानों की समस्याओं को भी उठाया, जिसमें गेंहू खरीदी के प्रभारी डिप्टी कलेक्टर विजय शाक्य जल्द निराकरण कराने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन में वरिष्ठ किसान नेता रामलखन हिरनीखेड़ा, बिहारी सिंह सोलंकी, हरि मोहन बौद्ध, जसवंत मीणा, ओपी मीणा धानोद, हनुमान मीणा, मुकेश मीणा सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
चम्बल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में भ्रष्टाचार के लगाये आरोप
167 करोड़ की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में भ्रष्टाचार की जांच एवं 10 जून से टेस्टिंग की मांग इस दौरान किसानों ने 167 करोड़ रुपये की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में हुए भ्रष्टाचार की जांच की मांग को लेकर अलग ज्ञापन भी सौंपा। किसानों ने परियोजना की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, 10 जून 2026 से टेस्टिंग हेतु पानी छोड़ने तथा दोषी अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत वैष्णव

