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खंडवाः किसान पिता-पुत्र ने जनसुनवाई में कलेक्टर को ‘बिकाऊ’, गिरफ्तार कर भेजा जेल, 6 घंटे बाद जमानत पर रिहा

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खंडवाः किसान पिता-पुत्र ने जनसुनवाई में कलेक्टर को ‘बिकाऊ’, गिरफ्तार कर भेजा जेल, 6 घंटे बाद जमानत पर रिहा


खंडवा, 05 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के खंडवा में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान किसान पिता-पुत्र ने कलेक्टर को ‘बिकाऊ’ कह दिया। दोनों हंगामा करने लगे, जिसके बाद प्रशासन ने किसान पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हालांकि, करीब 6 घंटे बाद रात में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया।

जानकारी के अनुसार, छैगांवमाखन क्षेत्र के ग्राम बरूड़ निवासी किसान रामनारायण कुमरावत अपने बेटे श्याम कुमरावत के साथ मंगलवार को कलेक्टर सभागार में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे थे। उन्होंने कलेक्टर ऋषव गुप्ता के सामने जमीन से जुड़े रास्ते के विवाद का मुद्दा रखा। कलेक्टर ने मामले को दिखवाने का आश्वासन दिया, लेकिन इसी दौरान किसान आक्रोशित हो गया। उसने अधिकारियों की ओर मुंह करते हुए कहा कि तुम सब बिकाऊ हो, समस्या नहीं सुलझाई तो मैं मर जाऊंगा। इस बयान के बाद सभागार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ती देख सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और पिता-पुत्र को बाहर कर दिया।

सभागार से बाहर आने के बाद किसान ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी। इसी दौरान सुरक्षाकर्मियों से कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई, जिससे तनाव बढ़ गया। सूचना मिलने पर सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर मौके पर पहुंचे और दोनों को हिरासत में लेने के निर्देश दिए। कोतवाली पुलिस ने पिता-पुत्र को कस्टडी में लेकर मजिस्ट्रेट के चैंबर में बैठाया। इसके बाद 2 बजे जेल भेज दिया। दोनों पर शांतिभंग की धाराओं में केस दर्ज किया गया।

घटना के बाद शहर कांग्रेस के पदाधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट के पास पहुंचे और जमानत की मांग की। उनका कहना था कि वे मुचलका देने को तैयार हैं। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि अभी जमानत नहीं दूंगा, जेल के दरवाजे बंद हो गए हैं। कल ऑफिस समय में आना, जमानत दे देंगे। इस पर कांग्रेस नेताओं ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि जानबूझकर जमानत में देरी की जा रही है। इसके विरोध में कांग्रेस ने कलेक्टर कार्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया।

धरने के बीच मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंच गया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को फोन कर जानकारी दी। इसके बाद पटवारी ने कलेक्टर से बात की। रात 8:35 बजे सिटी मजिस्ट्रेट कलेक्ट्रेट पहुंचे और कांग्रेस के आवेदन पर किसान पिता-पुत्र को जमानत दे दी। मौके पर पुलिस बल तैनात कर स्थिति पर नजर रखी गई।

सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर का कहना है कि पिता-पुत्र जनसुनवाई में लगातार हंगामा कर रहे थे और अधिकारियों से मारपीट की स्थिति बना रहे थे। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्काल कार्रवाई जरूरी थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सख्ती नहीं बरती जाए, तो जनसुनवाई व्यवस्था प्रभावित होगी और कोई भी अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर सकता है।

किसान का कहना है कि उसकी जमीन से जुड़े रास्ते का विवाद लंबे समय से चल रहा है। 1981 की रजिस्ट्री में रास्ता दर्ज होने के बावजूद 2019 में पड़ोसियों ने रास्ता बंद कर दिया। उसके अनुसार, उसने तहसील और एसडीएम कोर्ट में मामला जीता, यहां तक कि उच्च न्यायालय से भी राहत मिली, लेकिन स्थानीय स्तर पर आदेश का पालन नहीं हुआ। किसान का आरोप है कि उसने कई बार जनसुनवाई में आवेदन दिए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। रास्ता बंद होने के कारण उसकी जमीन पिछले तीन साल से खाली पड़ी है, जिससे उसे आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसी लगातार परेशानी और निराशा के चलते जनसुनवाई में उसका आक्रोश खुलकर सामने आया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर