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खंडवा: ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह नौ बजे के बाद पंडितों के प्रवेश पर रोक, सुरक्षाकर्मियों ने रोका तो कलेक्टर से लगाई गुहार

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खंडवा: ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह नौ बजे के बाद पंडितों के प्रवेश पर रोक, सुरक्षाकर्मियों ने रोका तो कलेक्टर से लगाई गुहार


खंडवा: ओंकारेश्वर मंदिर में सुबह नौ बजे के बाद पंडितों के प्रवेश पर रोक, सुरक्षाकर्मियों ने रोका तो कलेक्टर से लगाई गुहार


खंडवा, 22 जुलाई (हि.स.) । मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर में बुधवार सुबह नियमित पूजन-अर्चन कराने वाले पंडितों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। टी-पॉइंट पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोके जाने के बाद पंडितों और मंदिर प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। पंडितों ने इस फैसले के खिलाफ खंडवा कलेक्टर से शिकायत कर समाधान की मांग की है।

बुधवार सुबह 9 बजे के बाद जब स्थानीय पंडित नियमित पूजन और दर्शन के लिए मंदिर की ओर बढ़ने लगे, तो टी-पॉइंट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। पंडित राधे तिवारी और नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष नवल किशोर शर्मा ने आरोप लगाया कि सिक्योरिटी कंपनी के इंचार्ज तिलोक त्यागी ने एक संदेश जारी कर सुबह 9 बजे के बाद किसी भी पंडित को मंदिर में प्रवेश न देने के निर्देश दिए थे। सुरक्षाकर्मियों को यह सख्त चेतावनी भी दी गई थी कि आदेश की अनदेखी करने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और नौकरी भी जा सकती है। बताया जा रहा है कि यह कदम पुनासा एसडीएम पंकज वर्मा के निर्देशों के बाद उठाया गया।

दरअसल, पूरे विवाद की मुख्य वजह मंगलवार को घटी एक घटना बताई जा रही है। मंगलवार को पंडित दिनेश शर्मा एक 86 वर्षीय बुजुर्ग और अन्य श्रद्धालुओं के साथ दर्शन के लिए मंदिर गए थे। यद्यपि श्रद्धालुओं के पास ऑनलाइन दर्शन टिकट उपलब्ध थे, लेकिन एसडीएम ने सीसीटीवी कैमरों में पंडित को श्रद्धालुओं के साथ जाते देखा। प्रशासन को संदेह हुआ कि पंडित श्रद्धालुओं से अलग से शुल्क लेकर उन्हें विशेष दर्शन करा रहे हैं। इसके बाद एसडीएम ने कलेक्टर से चर्चा कर मौखिक आदेश जारी किए, जिसके आधार पर सुरक्षा विभाग ने पंडितों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।

अचानक लागू की गई इस व्यवस्था से नाराज पंडितों ने खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता से फोन पर बात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराईं। पंडितों ने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि अधिकृत पंडितों को मंदिर में निर्बाध प्रवेश दिया जाए, यजमानों के साथ जलाभिषेक की अनुमति बहाल हो और अभिषेक हॉल में श्रद्धालुओं का पूजन कराने की पूर्व व्यवस्था फिर शुरू की जाए। पंडितों का तर्क है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों से श्रद्धालुओं का पारंपरिक पूजन बाधित होगा और पंडितों की आजीविका पर संकट खड़ा हो जाएगा। कलेक्टर ने मामले में जल्द सकारात्मक समाधान का भरोसा दिलाया है, जबकि अंतिम निर्णय मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक में होने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत