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मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी ठप, सामान्य ऑपरेशन भी टले

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मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी ठप, सामान्य ऑपरेशन भी टले


मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 8 हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर, ओपीडी ठप, सामान्य ऑपरेशन भी टले


स्टाइपेंड संशोधन लागू न होने से नाराज डॉक्टरों का काम बंद आंदोलन, केवल आपातकालीन सेवाएं जारी

भोपाल, 09 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार जूनियर डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन के कारण प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं ठप हो गई हैं और सामान्य ऑपरेशन भी टल गए हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि जब तक लंबित स्टाइपेंड संशोधन लागू नहीं किया जाता और एरियर का भुगतान नहीं होता, तब तक वे ओपीडी समेत अन्य नियमित सेवाओं का बहिष्कार जारी रखेंगे।

गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल में असर

हड़ताल का असर राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े हमीदिया अस्पताल में साफ दिखाई दिया। यहां जूनियर डॉक्टरों के काम बंद करने से ओपीडी व्यवस्था प्रभावित हुई। मरीज सुबह से अपनी बारी के इंतजार में बैठे रहे। स्त्री रोग विभाग में पीपीटीसीटी काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर, फर्टिलिटी क्लिनिक और एएनसी रूम सहित कई सेवाएं प्रभावित हुईं, क्योंकि इनकी जिम्मेदारी वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ जूनियर डॉक्टर ही संभालते हैं। इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग घंटों से इलाज का इंतजार करते दिखाई दिए।

सिर्फ गंभीर मरीजों का ही इलाज

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन थिएटर में केवल गंभीर और आपातकालीन मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। इस वजह से हर्निया, रॉड इंप्लांट और अन्य तय सामान्य ऑपरेशन फिलहाल टल सकते हैं। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ सकता है जिनकी सर्जरी पहले से तय थी।

अप्रैल 2025 से लागू होना था नया स्टाइपेंड

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ. ब्रिजेंद्र सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के 7 जून 2021 के आदेश के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। लेकिन अब तक न तो संशोधित स्टाइपेंड लागू किया गया और न ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान किया गया है। कई बार शासन और संबंधित विभागों को इस संबंध में अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

तीन दिन से कर रहे थे विरोध

जूनियर डॉक्टर पिछले तीन दिनों से प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। मांगों पर कोई निर्णय नहीं होने के बाद सोमवार से हड़ताल शुरू कर दी गई। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार रेजिडेंट डॉक्टर किसी भी मेडिकल कॉलेज की रीढ़ होते हैं और अस्पतालों का करीब 70 प्रतिशत काम संभालते हैं—जिसमें मरीजों का इलाज, मॉनिटरिंग और आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं।

स्वास्थ्य मंत्री बोले—जल्द होगा समाधान

उधर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा है कि डॉक्टरों से बातचीत हो चुकी है और उनकी समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने डॉक्टरों से हड़ताल खत्म कर ड्यूटी पर लौटने की अपील की है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि मंत्री से मुलाकात के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे