झाबुआ: खेर लकड़ी की कटाई एवं अवैध परिवहन मामले में 3 आरोपी गिरफ्तार
झाबुआ, 2 दिसंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य झाबुआ जिले थांदला वन परिक्षेत्र में मंगलवार को खैर की लकड़ी की कटाई और अवैध परिवहन मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, साथ ही परिवहन कर रहे वाहन को बरामद कर लिया गया है। जिला वन मंडलाधिकारी के अनुसार मौके से वाहन एवं लगभग 0.990 घन मीटर (55 नग) गीली खैर लकड़ी को जब्त कर भारतीय वन अधिनियम 1927 की विभिन्न धाराओं सहित मध्यप्रदेश अभिवहन (वनोपज) नियम 2022 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
कार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए वनमंडलाधिकारी अमित वसंत निकम ने बताया कि खेर लकड़ी के अवैध परिवहन के संबंध में सूचना प्राप्त होने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए वन परिक्षेत्राधिकारी, थांदला, तोला राम हटीला द्वारा वन अमले का गश्ती एवं चेकिंग दल (परिक्षेत्र सहायक, अमरगढ़, तारसिंह भाभर, वन रक्षक कसु डामोर, प्रेमसिंह चारेल (पेटलावद), राकेश भाभर) गठित कर पेटलावद–अगराल मार्ग पर ग्राम झोसर के पास तैनात किया गया, और दल द्वारा जब वाहनों की चेकिंग की जा रही थी, उसी दौरान एक सफेद वाहन तेज गति से पेटलावद की ओर से आता दिखाई दिया। दल द्वारा वाहन को रोककर जब परीक्षण किया गया, तो उस वाहन (क्रमांक एम पी 05 जी 7108) में खैर प्रजाति की गीली लकड़ी भरी हुई पाई गई। चेकिंग दल के पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि आरोपित वाहन चालक के पास खेर लकड़ी परिवहन से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं हैं।
आरोपित वाहन चालक ने अपना नाम आशीष पिता प्रभु भाभोर, निवासी अंतर्वेलिया, तहसील झाबुआ बताया। कार्यवाही में संलिप्त आरोपी वाहन चालक आशीष तथा दो अन्य आरोपी राकेश एवं पान सिंह को हिरासत में लेकर वन परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया तथा वाहन को राजसात की कार्रवाई हेतु वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। विभागीय टीम द्वारा मौके से वाहन एवं 0.990 घन मीटर (55 नग) गीली खैर लकड़ी को जब्त कर भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 41, 52, 67 एवं मध्यप्रदेश अभिवहन (वनोपज) नियम 2022 के उपनियम 3, 9, 10, 14, 16 के तहत प्रकरण क्रमांक 2013/18 दिनांक 02/12/2025 दर्ज किया गया।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि गीली खैर लकड़ी कचरू पिता बुहारीया कटारा, निवासी झोसर माता पाड़ा, तहसील पेटलावद की निजी भूमि तथा आसपास की अन्य निजी एवं शासकीय भूमि से बिना अनुमति काटी गई है, जो मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165(6) के साथ-साथ मध्यप्रदेश आदिम जनजाति संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 एवं 2017 का उल्लंघन है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. उमेश चंद्र शर्मा

