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जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, प्रदेश में हजारों रिक्त पदों और “कृषक कल्याण वर्ष” को लेकर साधे सवाल

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जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, प्रदेश में हजारों रिक्त पदों और “कृषक कल्याण वर्ष” को लेकर साधे सवाल


भाेपाल, 05 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्हाेंने मध्य प्रदेश की कृषि व्यवस्था की बदहाल स्थिति, कृषि एवं उससे जुड़े विभागों में हजारों रिक्त पदों और राज्य सरकार द्वारा घोषित “कृषक कल्याण वर्ष” के बीच मौजूद गंभीर विरोधाभास की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

जीतू पटवारी ने गुरुवार काे लिखे अपने पत्र में कहा है कि मध्य प्रदेश को देश का “कृषि प्रधान राज्य” कहा जाता है, लेकिन आज राज्य की कृषि व्यवस्था स्वयं ही सरकारी उदासीनता के बोझ तले दम तोड़ रही है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किया है, किंतु सरकारी तंत्र की वास्तविक स्थिति इस घोषणा को एक कड़वा मज़ाक बना रही है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद रिक्त हैं, अर्थात लगभग 60 प्रतिशत अमला अनुपस्थित है। ऐसी स्थिति में शेष कर्मचारियों से पूरे प्रदेश के किसानों की समस्याओं का समाधान कराने का दावा करना वास्तविकता से परे है।

विभागों में भी भारी रिक्तता

पटवारी ने बताया कि यह स्थिति केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि से जुड़े कई सहयोगी विभागों में भी भारी रिक्तता है। मत्स्य पालन विभाग में 1,290 पदों में से 722 पद खाली हैं, उद्यानिकी विभाग में 3,079 पदों में से 1,459 पद रिक्त हैं, जबकि पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 7,992 पदों में से 1,797 पद खाली हैं। इसी प्रकार सहकारिता विभाग में लगभग 35 प्रतिशत पद रिक्त हैं। खाद्य तंत्र की स्थिति भी चिंताजनक है। खाद्य संचालनालय में 109 पदों के विरुद्ध केवल 48 कर्मचारी कार्यरत हैं। जिलों के कार्यालयों में 598 पदों के मुकाबले मात्र 245 कर्मचारी हैं और खाद्य आयोग में 61 पदों में से 48 पद रिक्त हैं। उन्होंने कहा कि कृषि प्रशासन के शीर्ष स्तर पर भी स्थिति गंभीर है। वरिष्ठ अधिकारियों के 182 स्वीकृत पदों में से 113 पद खाली हैं, जिनमें अपर संचालक, संयुक्त संचालक और उप संचालक जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। मैदानी स्तर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जैसे पद लगभग 60 प्रतिशत तक रिक्त हैं, जबकि यही अधिकारी किसानों तक सरकारी योजनाएं और तकनीकी सलाह पहुंचाने की रीढ़ माने जाते हैं।

पटवारी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि प्रदेश की कृषि संस्थाओं में भी यही स्थिति दिखाई देती है। कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में 1,065 पदों में से 557 पद खाली हैं। बीज एवं फार्म विकास निगम में 14 में से 5 पद रिक्त हैं। जैविक प्रमाणीकरण संस्था में 23 में से 8 पद खाली हैं। कृषि विस्तार प्रशिक्षण संस्थान में 49 में से 27 पद रिक्त हैं तथा मंडी बोर्ड में भी लगभग 40 प्रतिशत पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकारी तंत्र ही आधा खाली हो, तब किसानों का कल्याण किसके भरोसे होगा? प्रदेश के लाखों किसान फसल नुकसान, बढ़ती लागत, बाजार अस्थिरता और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा कागजों में ही मौजूद है।

“कृषक कल्याण वर्ष” पर साधा निशाना

जीतू पटवारी ने कहा कि इस विडंबना को और गहरा बनाता है राज्य सरकार का राजनीतिक प्रचार। “कृषक कल्याण वर्ष” का नारा दिया जा रहा है, जबकि कृषि विभाग स्वयं ही कर्मियों के अभाव में लाचार है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान लगभग दो दशकों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। यदि उस लंबे कार्यकाल में कृषि व्यवस्था को मजबूत किया गया होता, तो आज प्रदेश का कृषि तंत्र इस तरह खाली और कमजोर नहीं होता। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार विपक्ष के नाते कांग्रेस बार-बार सरकार को सचेत कर रही है कि कृषक कल्याण केवल नारों, पोस्टरों और विज्ञापनों से नहीं आता, बल्कि इसके लिए मजबूत प्रशासनिक तंत्र, प्रशिक्षित अमला और जवाबदेह व्यवस्था आवश्यक होती है।

प्रधानमंत्री से की तीन मांगें

1. केंद्र सरकार की निगरानी में मध्यप्रदेश में कृषि और उससे जुड़े विभागों में रिक्त पदों की स्थिति की तत्काल समीक्षा कराई जाए।

2. किसानों से जुड़े विभागों में शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करवाने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए।

3. कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मैदानी स्तर पर संस्थागत क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय रणनीति तैयार की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे