श्योपुर : बाढ़ राहत घोटाले में घिरी विजयपुर तहसीलदार, जांच तेज होने से गिरफ्तारी की आशंका
श्योपुर, 17 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले की विजयपुर तहसील में पदस्थ तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वर्ष 2021 के बहुचर्चित बाढ़ राहत घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस मामले में राहत प्रदान करने का कोई ठोस कानूनी आधार मौजूद नहीं है। ऐसे में उनका जेल जाना लगभग तय माना जा रहा है।
मालूम हो कि, वर्ष 2021 में श्योपुर जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने प्रभावितों के लिए राहत राशि स्वीकृत की थी। उस समय अमिता सिंह तोमर बड़ौदा तहसील में तहसीलदार पद पर पदस्थ थीं। आरोप है कि करीब दो करोड़ रुपये की राशि में अनियमितता करते हुए यह धन वास्तविक बाढ़ पीड़ितों के बजाय अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया गया था।
भ्रष्टाचार की जांच में फंसीं तहसीलदार
यह पूरा मामला 2021 में श्योपुर जिले में आई भीषण बाढ़ के दौरान राहत सामग्री के वितरण और मुआवजे के भुगतान में हुई बड़ी अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच के बाद बड़ौदा थाना पुलिस ने अमिता सिंह तोमर के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। तहसीलदार पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मुआवजा प्रक्रिया में धांधली की।
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं
हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अमिता सिंह तोमर ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और इस प्रकरण से संबंधित सभी लंबित आवेदनों को भी समाप्त कर दिया है।
जमानत खारिज होने से बढ़ गई गिरफ्तारी की संभावना
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब तहसीलदार की गिरफ्तारी की प्रबल संभावना बन गई है। प्रशासनिक और पुलिस महकमा अब अगली कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है। इस फैसले के बाद जिले के राजस्व विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि इस घोटाले के तार कई अन्य पटवारियों से भी जुड़े हैं, जिन्हें कहीं न कहीं राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत वैष्णव

