भारत हिंदू राष्ट है,इसे आज सभी स्वीकार कर रहे.....
उज्जैन, 10 अप्रैल (हि.स.)। भारत हिंदू राष्ट्र है, इसे आज सभी स्वीकार कर रहे। जो संसद से सड़कों तक संघ का विरोध करते थे वे आज संसद में बहस के दौरान स्वीकार करते हैं कि हम हिंदू हैं,यह गर्व की बात है। भारत सदियों से गौरवशाली था और आज भी गौरवशाली है। बीच के समय में अंग्रेजों ने भारत के गौरव पर प्रश्रचिंह लगाए लेकिन यदि इतिहास उठाकर देखें तो जानकारी में आएगा कि आज से 3,500 वर्ष पूर्व की पाण्डुलिपि में लिखा है कि भारत सदियों से,सनातन काल से एक राष्ट्र रहा है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सहसरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कही। वे शुक्रवार रात लोकमान्य टिळक शिक्षा परिसर,नीलगंगा में आयोजित 40वीं डॉ.हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला के प्रथम दिवस पर ''100 वर्ष की संघ यात्रा विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहाकि उज्जैन काल-मोक्ष और ज्ञान की त्रिवेणी है। यहां व्याख्यानमाला का सतत 40 वर्ष तक चलना एक सामान्य बात नहीं है। अपने विषय को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहाकि राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने अपनी कविता में लिखा था-ऋषि भूमि भारत वर्ष है। उन्होने वर्णन किया था कि प्राचीन समय में भारत कैसा रहा होगा। आगे बताया कि उस समय का भारतवर्ष भी दुनिया को दिशा देनेवाला रहा। वैसा ही भारत फिर से बनना चाहिए.....।
उनके इस सपने को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की यात्रा 100 वर्ष से निरंतर चल रही है। यह यात्रा साधारण नहीं,असामान्य है। कोई भी संगठन प्रारंभ होता है तो एक निश्चित कालखण्ड तक चलता है और फिर बंद हो जाता है। लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आज स्वीकारोक्ति तक पहुंच चुका है। इसके पूर्व इसका उपहास हुआ है। जब डॉ. हेडगेवार ने संघ यात्रा प्रारंभ की तो पुणे के लोग कहते थे कि नागपुर के संतरे वहीं बेचो। लेकिन डॉ.हेडगेवार कहते थे कि एक दिन ऐसा आएगा जब नागपुर का संतरा पूरे देश में मुहमांगे दाम पर बिकेगा। संघ आगे बढ़ता चला गया। संघ का विरोध भी बढ़ा। वर्ष-1948 में संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगा। स्वयंसेवक जब गलियों से निकलते तो लोग दरवाजा बंद कर लेते थे। बाद में संघ से यह आरोप समाप्त हुआ। वर्ष-1948 में ही देश की स्वतंत्रता के लिए 77 हजार स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह किया और जेल गए। वर्ष-1975 में इंदिरा गांधी का चुनाव न्यायालय ने निरस्त किया ओर आरोप संघ पर लगा। देशभर में 67 हजार स्वयंसेवकों को जेल के पिछे भेज दिया गया। जब चुनाव घोषित हुआ और जनमत आया तो देश में पुन: लोकतंत्र स्थापित हुआ। संघ कार्य फिर से प्रारंभ हो गया।
चक्रधर ने कहाकि विजयादशमी पर 37 लाख स्वयंसेवक गणवेश में निकले। देश में 83 हजार शाखाएं हैं। उस काल में नो (एनओ)आरएसएस कहा जाता था, अब(केएनओडब्ल्यू)नो आरएसएस हो गया है। संघ को समझना होगा। एक वर्ष पूर्व अक्टूबर माह ज्वाइन आरएसएस पर साढ़े पांच हजार रिक्वेस्ट आई थी। गत अक्टूबर माह में यह 48 हजार हो गई। संघ को जानने,समझने के लिए लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है। संघ कार्य समझना है तो डॉ.हेडगेवार को समझना होगा। संघ गंगा की गंगोत्री डॉ.हेडगेवार हैं।
गीता के 16वें अध्याय में श्रीकृष्ण ने कहा है दैवीय सम्पदा याने सभी गुणों को देखना। डॉ.हेडगेवार के जीवन चरित्र को देखें तो उसमें साहस मिलेगा। वे कभी नहीं झुके। उनका घर घोर दरिद्रता की अवस्था में रहा। वे कहा करते थे-इस देश का समाज अपने आप को भुल चुका है कि वह श्रेष्ठ पूर्वजों की संतति है। उसे आत्मबोध करवाना आवश्यक है। आत्मबोध होने पर जब सिंह का बच्चा दहाड़ता है तो जंगल के जानवर भाग जाते हैं। वे चाहते थे कि आत्मकेंद्रीत समाज को राष्ट्रकेंद्रीत समाज में बदलना है। असंगठित समाज को संगठित करना है। इसीलिए उन्होने कार्यपद्धति तय की। शाखा में बार बार मिलने से आपसी संवाद,समन्वय,स्नेह बढ़ता है। एक दूसरे को जानने का मौका मिलता है। इसीलिए रोजाना तय समय पर एक स्थान पर एकत्रित होना। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने कभी विज्ञापन नहीं किया। घर-घर जाकर सम्पर्क किया। आज देशभर में शाखाओं का जाल खड़ा है। लाखो कार्यकर्ता देश के लिए खड़े हैँ। अहम से वहम का सोचनेवाले अब अपने से देश-समाज की सोचने लगे हैं।
आपने कहाकि गुरूजी के नेतृत्व में संघ संघ यात्रा का दूसरा चरण प्रारंभ हुआ। वर्ष-1948 के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने विविध क्षेत्रों में काम करना प्रारंभ किया। समाज जीवन में काम किया। आज 42 से अधिक विविध संगठन काम कर रहे हैं। अब समाज कहता है कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं....। यह आत्मविस्मृत से आत्मबोध की वैचारिक यात्रा है। रामनवमी पर एक करोड़ हिदू कोलकाता की सड़कों पर था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री नारायण व्यास ने की। मंच पर डॉ.हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला समिति के अध्यक्ष नितिन गरूड़ भी विराजीत थे। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। केशव अर्चना पश्चात अतिथि परिचय क्षमाशील मिश्रा ने दिया। अतिथि स्वागत उल्लास वैद्य एवं प्रशांत शर्मा ने किया। गीत सार्थक गहलोत ने प्रस्तुत कियिा। वंदे मातरम् की प्रस्तुति अनामिका सोनी ने दी। मंच संचालन राहुल विपट ने किया। आभार राजेश गर्ग ने माना।
आज का व्याख्यान
व्याख्यानमाला के दूसरे दिवस शनिवार को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदुत्व विषय पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्य भारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.सुधीर गवारीकर करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

