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अशोकनगर में ‘दोहरा लोकार्पण’ बना चर्चा का विषय: पहले सीएम कर चुके उद्घाटन, अब सिंधिया ने फिर काटा फीता

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अशोकनगर में ‘दोहरा लोकार्पण’ बना चर्चा का विषय: पहले सीएम कर चुके उद्घाटन, अब सिंधिया ने फिर काटा फीता


अशोकनगर में ‘दोहरा लोकार्पण’ बना चर्चा का विषय: पहले सीएम कर चुके उद्घाटन, अब सिंधिया ने फिर काटा फीता


अशोकनगर, 04 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा जिन विकास कार्यों का हाल ही में लोकार्पण किया गया, वे एक महीने पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उद्घाटित किए जा चुके थे।

दरअसल, सिंधिया अपने चार दिवसीय दौरे के दौरान क्षेत्र में कई कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने अशोकनगर-पिपरई मार्ग पर लगभग 7.06 करोड़ रुपये की लागत से बने ओर नदी पुल और ग्राम पंचायत कजराई के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में इन परियोजनाओं को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया।

हालांकि, रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि 8 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने करीला धाम प्रवास के दौरान करीब 115 करोड़ 35 लाख रुपये के विकास कार्यों का डिजिटल लोकार्पण किया था। उस सूची में ओर नदी पुल और कजराई पंचायत भवन भी शामिल थे। उस समय मंच पर प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला और पूर्व सांसद डॉ. केपी यादव भी मौजूद थे।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन परियोजनाओं का पहले ही आधिकारिक लोकार्पण हो चुका था, तो दोबारा कार्यक्रम की अनुमति कैसे मिली? क्या यह प्रशासनिक चूक है या फिर राजनीतिक स्तर पर समन्वय की कमी?

राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ इसे ‘क्रेडिट लेने की होड़’ बता रहे हैं, तो कुछ इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस दोहरे लोकार्पण को लेकर चुटकियां ले रहे हैं।

यह मामला अब न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि राजनीतिक समन्वय की स्थिति को भी उजागर कर रहा है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे प्रकरण पर संबंधित पक्षों की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार