हमारे यहाँ राजदंड से बड़ा धर्मदंड माना गया है — मुकेश दिसवाल
मंदसौर, 02 मार्च (हि.स.)। होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि पुरानी कटु स्मृतियों को भुलाकर नए स्नेह और सौहार्द की शुरूआत करने का उत्सव है। यह अहंकार और शोक को दूर कर समाज को एक सूत्र में पिरोने का पर्व है। हमारी जड़ें सनातन संस्कृति में हैं और हमारे यहाँ राजदंड से भी ऊपर धर्मदंड को स्थान दिया गया है।
उक्त विचार मालवा प्रांत के प्रांत समरसता संयोजक मुकेश दिसवाल ने सोमवार को मंदसौर में माहेश्वरी धर्मशाला में आयोजित सामाजिक समरसता मंच के होली मिलन समारोह में नगर के समाज प्रमुखों,सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक संगठन प्रमुखों एवं उपस्थित मातृशक्ति के बीच मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थित होकर व्यक्त किये।
अपने संबोधन में दिसवाल ने कहा कि हमारी बोली, रहन-सहन और परंपराएँ भिन्न हो सकती हैं, किंतु हमारी राष्ट्रीयता एक है। हमारी संस्कृति में जीवन-मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। ह्यसर्वे भवन्तु सुखिन:ह्ण की भावना ही हमें जोड़ती है। उन्होंने कहा कि हम बड़े-बड़े विचार तो व्यक्त करते हैं, परंतु व्यवहार में उन्हें उतारने की आवश्यकता है। समाज के घुमंतू एवं वंचित वर्गों को सम्मानपूर्वक अपनाना ही वास्तविक समरसता है। संतों और महापुरुषों को जाति-भेद में बाँटना समाजहित में नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण हुआ था, तब अनेक वीरों एवं संतों ने धर्म की रक्षा हेतु संघर्ष किया। भारतवर्ष के निर्माण में हजारों संतों और महापुरुषों का योगदान रहा है। नई पीढ़ी को उनके त्याग और बलिदान से परिचित कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज भी कई स्थानों पर भेदभाव की प्रवृत्ति दिखाई देती है, जो चिंतन का विषय है। समाज के दबे-कुचले वर्गों को सम्मानपूर्वक गले लगाकर ही वास्तविक समरसता स्थापित की जा सकती है। देश और समाज में परिवर्तन लाने के लिए पहले स्वयं में परिवर्तन आवश्यक है।
विशेष अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए भागवताचार्य पंडित मिथिलेश नागर ने कहा कि भारत ही ऐसा देश है जो समस्त विश्व के कल्याण की कामना करता है। समरसता केवल भाषणों से नहीं आएगी, बल्कि उन बंधुओं के साथ आत्मीयता से जुड़ने से आएगी, जो स्वयं को उपेक्षित अनुभव करते हैं। समरसता का भाव जीवन में आत्मसात करना होगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति, समाज प्रमुख एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर सहभोज किया। उक्त कार्यक्रम दिनांक 8 मार्च को रंग पंचमी में अवसर पर नगर में घंटाघर (आजाद चौक) से प्रात: 11 बजे निकलने वाली फाग यात्रा के संदर्भ में रखी गयी थी।रंगपचमी पर इस बार नगर की सभी 20 बस्तियों के चयनित केन्द्रो से उस क्षेत्र के समाजजनों द्वारा एकत्रित होकर रंगों से सरोबार होती हुई गैर प्रात: 11 बजे तक घंटाघर पहुंचेगी जहाँ से एक भव्य फाग यात्रा बस स्टेण्ड होती हुई गांधी चौराहे पर पहुंचेगी। स्वागत भाषण फाग महोत्सव समिति के अध्यक्ष राजेश कासट ने प्रस्तुत किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया

