उज्जैनः नारायणा धाम में 251 क्विंटल फूलों से खेली होली
उज्जैन, 02 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के प्राचीन नगर उज्जैन में जिस स्वर्णगिरी पर्वत पर भगवान श्री कृष्ण और सुदामा ने लकड़ियां लाकर नारायणा धाम में रखी थीं, वहां की पारंपरिक फूलों की होली सोमवार को एक बार फिर धूमधाम से मनाई गई।
इस वर्ष श्रद्धालुओं ने अपने द्वारा लाए गए 251 क्विंटल फूलों के साथ होली खेली। इस आयोजन में विशेष रूप से स्वर्णगिरी पर्वत से लाए गए पलाश के फूल शामिल थे। फाग उत्सव में देशभर के कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं के साथ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
महिदपुर के स्वर्णगिरी पर्वत के पीठाधीश्वर महेंद्रगिरी महाराज वर्षों की परंपरा का निर्वहन करते हुए पलाश के फूल लेकर नारायणा धाम पहुंचे। इससे पूर्व, ग्राम चरणमया चिरमिया स्थित मुखारविंद पर सुबह मुख्य पुजारी पं. प्रेमनारायण शर्मा ने भगवान स्वर्णगिरीराज का अभिषेक किया। भक्तों द्वारा रंग-गुलाल और पलाश के पुष्प अर्पित करने के बाद, पीठाधीश्वर महेंद्रगिरी महाराज पैदल यात्रा करते हुए नारायणा धाम पहुंचे। यहां नारायणा धाम के पुजारी ने तिलक लगाकर उनकी अगवानी की। पीठाधीश्वर ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के चरणों में पलाश के पुष्प और रंग-गुलाल अर्पित किया, जिसके बाद फूलों की होली प्रारंभ हुई।
सुबह नारायणा धाम से ध्वज यात्रा और होली उत्सव चल समारोह शुरू हुआ। इस यात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट, बैंड-बाजे, नृत्य करती कलाकार मंडलियां और अखाड़े शामिल हुए। यात्रा के दौरान तोपों से रंग-गुलाल और फूलों की भारी बौछार की गई। संपूर्ण गांव में भ्रमण करते हुए फाग यात्रा वापस मंदिर पहुंची। ग्रामवासियों ने जगह-जगह मंच लगाकर पुष्प वर्षा से यात्रा का स्वागत किया और जलपान के साथ पोहे-जलेबी के अल्पाहार की व्यवस्था की।
शिखर पर फहराई ध्वजा, हुआ महाप्रसादी का वितरण
मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर पांच पंडितों द्वारा ध्वज और लड्डू गोपाल की पंच आरती की गई। पश्चात ध्वजारोहण के लाभार्थी मंगलनाथ मंदिर के पुजारी महंत जितेंद्र भारती और जया भारती के चरण पखार कर और तिलक लगाकर उनकी अगवानी की गई। दोपहर 2 बजे मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण हुआ। कार्यक्रम के अंत में चने और चावल प्रसाद का वितरण किया गया एवं भंडारे का आयोजन हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

