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हाईकोर्ट ने सुनाए शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय, शिक्षक वर्ग में खुशी की लहर

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हाईकोर्ट ने सुनाए शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय, शिक्षक वर्ग में खुशी की लहर


जबलपुर, 02 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए शिक्षकों की सेवा को पूर्ण रूप से मान्यता और सम्मान दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित शिक्षकों को 100 प्रतिशत वेतन प्रदान किया जाए।

इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि शिक्षकों को उनकी पसंद के जिले में पदस्थापित किया जाए, ताकि उन्हें कार्य करने में सुविधा मिल सके। इस फैसले से प्रदेशभर के शिक्षकों में संतोष और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने शिक्षकों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन डीपीआई कमिश्नर शिल्पा गुप्ता द्वारा जारी सभी पुराने आदेशों को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों को उनकी पूर्व सेवा अवधि के आधार पर पूरा वेतन दिया जाए।

अब तक जहां शिक्षकों को केवल 70% वेतन मिल रहा था, वहीं नए आदेश के अनुसार उन्हें सीधे 100% वेतन के साथ नई जॉइनिंग दी जाएगी। शिक्षकों की पुरानी सीनियरिटी बरकरार रहेगी और उन्हें प्रमोशन में भी इसका पूरा लाभ मिलेगा। विभाग को 30 दिनों के भीतर इन सभी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना होगा। शिक्षकों को उनकी चॉइस फिलिंग के आधार पर मनचाहे जिलों में तुरंत पदस्थापना मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग की संयुक्त काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ था। डीपीआई विभाग पर भर्ती के समय आरक्षण नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगे।

आरोपों के अनुसार, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग के कई योग्य अभ्यर्थियों को उनके गृह स्थान से सैकड़ों किलोमीटर दूर, लगभग 900 किलोमीटर तक दूरस्थ ट्राइबल क्षेत्रों में पदस्थ किया गया। वहीं, कम अंक प्राप्त करने वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को उनके घर के आसपास ही स्कूल आवंटित कर दिए गए।

इस मामले वसे उद्धेलित शिक्षकों ने अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के माध्यम से अदालत का रुख किया, जिसके बाद यह मामला न्यायालय में विचाराधीन हुआ।

हाईकोर्ट ने पहले ही शिक्षकों को उनकी पसंद के जिले में भेजने का आदेश दिया था। लेकिन डीपीआई की तत्कालीन कमिश्नर शिल्पा गुप्ता ने अदालत के आदेश को गलत तरीके से लागू किया। उन्होंने शिक्षकों को नई नियुक्ति बताकर केवल 70% वेतन देने का आदेश जारी किया।

आईएएस शिल्पा गुप्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को मानने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दलीलों को पहली बार में ही खारिज कर दिया। इससे पहले हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ 10 हजार रुपए का जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था। इसके बावजूद उन्होंने शिक्षकों की वरिष्ठता और पुरानी सेवाओं को जोड़ने से साफ इनकार कर दिया था। अंत में जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने इस कृत्य को पूरी तरह असंवैधानिक माना।

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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक