मप्रः हाईकोर्ट बार अध्यक्ष का वाट्सअप अकाउंट दो बार ब्लॉक, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
जबलपुर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सीनियर एडवोकेट मृगेंद्र सिंह का वाट्सएप अकाउंट दो बार ब्लॉक किए जाने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। मृगेंद्र सिंह ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मंगलवार को याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई 7 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
याचिका के मुताबिक, मृगेंद्र सिंह लंबे समय से अपने प्राथमिक WhatsApp नंबर का इस्तेमाल पेशेवर और कानूनी कार्यों के लिए कर रहे थे। आरोप है Nने बिना किसी पूर्व सूचना और स्पष्ट कारण बताए उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया। याचिका में कहा गया है कि उन्हें न तो कोई शो-कॉज नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
अकाउंट ब्लॉक होने के कारण वकालत से जुड़े जरूरी संवाद प्रभावित हुए। इसके बाद उन्होंने नया सिम लेकर दूसरे नंबर से अकाउंट बनाया, लेकिन याचिका के अनुसार 4 अक्टूबर 2026 को उस अकाउंट को भी प्रतिबंधित कर दिया गया।
इसके बाद अधिवक्ता घूंचा रसूल के माध्यम से वाट्सएप के गुरुग्राम स्थित ग्रीवांस ऑफिसर को कानूनी नोटिस भेजा गया। नोटिस में 48 घंटे के भीतर दोनों अकाउंट बहाल करने के साथ ही अकाउंट ब्लॉक किए जाने से संबंधित तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया है कि नोटिस के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में वाट्सअप द्वारा अकाउंट प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी व्यक्ति का अकाउंट बिना कारण बताए, बिना नोटिस दिए और अपना पक्ष रखने का अवसर दिए प्रतिबंधित करना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्तमान समय में वाट्सएप अधिवक्ताओं के पेशेवर संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। मुकदमों से संबंधित सूचनाओं और दस्तावेजों के आदान-प्रदान से लेकर मुवक्किलों के साथ जरूरी संवाद तक बड़ी संख्या में कानूनी गतिविधियां इसी माध्यम से संचालित होती हैं। ऐसे में अकाउंट अचानक ब्लॉक होने से पेशेवर कार्य प्रभावित होने का दावा किया गया है।
याचिका में इस कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 21 तथा त्वरित न्याय से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में भी उठाया गया है। मृगेंद्र सिंह ने कहा है कि बिना ठोस कारण बताए बार-बार अकाउंट ब्लॉक किए जाने से उनके पेशेवर और सामाजिक स्तर पर गलत संदेश जा सकता है।
याचिका में अकाउंट प्रतिबंधित किए जाने की कार्रवाई को उनकी प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक

