home page

मंदसौरः परमात्मा के वचनों के प्रति श्रद्धा रखो- मुनि प्रत्यक्षरत्नविजय

 | 
मंदसौरः परमात्मा के वचनों के प्रति श्रद्धा रखो- मुनि प्रत्यक्षरत्नविजय


मंदसौर, 30 अगस्त (हि.स.)। संसार में अधिकांश मनुष्य चाहे वे किसी भी धर्म के हो वे ईश्वर या परमात्मा, प्रभु या जो भी नाम दे दो उसे मानते ही हैं। प्रभु को मानना और उनके बताये मार्ग पर चलना हमारा कर्तव्य होना चाहिये, लेकिन जीवन में वास्तविकता यह है कि हम प्रभु (परमात्मा) को तो मानते हैं लेकिन प्रभु (परमात्मा) की नहीं मानते अर्थात परमात्मा ने हमें जीवन में जो जिनवाणी का संदेश दिया है हम उसे पूरी तरह नहीं मानते, इसी कारण हमारे मन में अस्थिरता है, दुख है। जीवन में हम परमात्मा को मानने के बजाय यदि परमात्मा के वचनों को भी मानो तभी जीवन में कल्याण होगा।

उक्त उद्गार जैन संत मुनिराज प्रत्यक्षरत्न विजय म.सा. ने रविवार को मध्य प्रदेश के मंदसौर में राजेन्द्र विलास जीवागंज में आयोजित धर्मसभा में कहे। उन्होंने मुनि पवित्ररत्नजी म.सा. क उपस्थिति में रविवार को आयोजित धर्मसभा में कहा कि परमात्मा के वचनों अर्थात जिनवाणी को याद करना परमात्मा को याद करने के समान महत्वपूर्ण है। कई बार हम परमात्मा की प्रतिमा की तो पूजा करते हैं उनके दर्शन-वंदन करते हैं लेकिन परमात्मा ने जो जीवन दर्शन जिनवाणी का संदेश दिया है हम उसे स्मरण नहीं रखते हैं। हमारी यही प्रवृत्ति ही हमारे दुखों एवं मन की अस्थिरता का कारण है। आपने कहा कि जीवन में यदि हम परमात्मा के वचनों पर श्रद्धा रखेंगे तो इस संसार रूपी भवसागर में डूबने से बच जायेंगे। जीवन में आपने यदि परमात्मा के वचनों अर्थात उनकी शिक्षाओं को भुला दिया तो समझो आपने परमात्मा को भी भुला दिया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में धमार्लुजन उपस्थित थे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया