ग्वालियरः कलेक्टर ने टीबी मरीजों को सौंपीं पोषण आहारयुक्त फूड बास्केट
- साझा प्रयासों से साकार होगा टीबी मुक्त ग्वालियर का संकल्प - कलेक्टर
ग्वालियर, 03 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में “100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत टीबी मरीजों को बेहतर उपचार के साथ आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को कलेक्टर रुचिका चौहान ने कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम में क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित मरीजों को पोषण आहारयुक्त फूड बास्केट प्रदान कीं।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम.एस. सागर, जिला क्षय अधिकारी डॉ. विजय पाठक सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। बताया गया है कि अभियान के अंतर्गत जिले में कुल 300 फूड बास्केट वितरित की जा रही हैं।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि टीबी जैसी बीमारी से पूर्णतः स्वस्थ होने के लिए नियमित दवा के साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार भी अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न पोषक तत्वों से युक्त फूड बास्केट मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जिले के प्रत्येक टीबी मरीज तक पोषण सहायता पहुँचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि टीबी मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराने के लिए जनप्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, सामाजिक संस्थाओं एवं सेवाभावी नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ें। समाज के व्यापक सहयोग से ही टीबी मुक्त ग्वालियर और टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य समयबद्ध रूप से प्राप्त किया जा सकेगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एम.एस. सागर ने बताया कि विशेष 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत जिले में टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान, गुणवत्तापूर्ण एवं नियमित उपचार तथा निक्षय मित्र योजना के माध्यम से पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
जिला क्षय अधिकारी डॉ. विजय पाठक ने बताया कि टीबी के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए जिलेभर में लगातार जनजागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। आमजन को टीबी के लक्षण, समय पर जांच, नियमित उपचार तथा पोषण के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि टीबी के प्रति भ्रांतियों को दूर कर अधिक से अधिक मरीजों का समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर

